
तीन साल पहले मो. फारूक का एक्सीडेंट हो गया था। उसके बाद से वे चल नहीं पा रहे, लेकिन लोकतंत्र के उत्सव में भागीदारी निभाना नहीं भूले। नैनीजी का मंदिर में जब व्हील चेयर पर मतदान के लिए पहुंचे तो रैम्प नहीं था। परिवार के लोग उनको व्हील चेयर के साथ उठाकर ले गए और मतदान करवाया। फारूक जैसे लाग ही लोकतंत्र के इस महापर्व को जीवंत रखे हुए है। सरदारपुरा विधानसभा सीट पर जब लाइव रिपोर्ट करने पत्रिका टीम पहुंची तो शुरुआत की कुछ ऐसी हुई।
इसके बाद संत लाडाराम स्कूल में बने तीन बूथ पर पहुंचे। भाग संख्या 149 तो पूरी तरह से खाली पड़ा था, जबकि दो अन्य बूथ पर कतारें लगी थी। इसके बाद मंडोर स्थित बालसमंद स्कूल पहुंचे। यहां मतदान के लिए लोगों में जबरदस्त उत्साह नजर आया। पैर में फ्रैक्चर होने पर भी एक व्यक्ति व्हील चेयर पर मतदान के लिए पहुंचा।
झुलसने का गम भुलाकर जीवंत किया उदाहरण
भोमाराम जोशी कीर्ति नगर अग्निकांड में झुलस गए थे। अभी तक उनके जख्म भरे नहीं है। इस हादसे में इन्होंने अपने बेटे को खोया था, लेकिन फिर भी इस लोकतंत्र के उत्सव में पहुंचे। वे बताते हैं कि सामाजिक दायित्व सबसे महत्वपूर्ण है। महामंदिर स्थित वर्धमान जैन स्कूल में लक्षिता पहली बार मतदान करने पहुंची। उसके चेहरे पर अलग ही मुस्कान थी। उसने कहा कि यह अपने आप में अनूठा अनुभव है।
पहले तेज फिर धीमा पड़ा मतदान
सरदारपुरा क्षेत्र में मतदान शुरुआती दो घंटे में सबसे तेज रहा। सुबह 9 बजे तक ही 10 प्रतिशत से ज्यादा वोट पड़ गए। लेकिन इसके बाद रफ्तार धीमी हो गई। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व भाजपा प्रत्याशी महेन्द्र राठौड़ खुद बूथ पर घूम कर जायजा लेते नजर आए। बता दें कि सरदारपुरा विधानसभा सीट पर कुल 64.50 प्रतिशत वोटिंग हुई।
Published on:
26 Nov 2023 11:02 am
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