
जोधपुर. कपड़ों व कागज पर छपाई के लिए वुडकट प्रिंटिंग की शुरुआत सिंधु घाटी सभ्यता से पहले की मानी गई है। जिसमें पारंपरिक प्रिंट मेकिंग तकनीकों में वुडकट, लोहे एवं जिंक पर कार्विंग व लिथोग्राफी शामिल है। मारवाड़ की बेटी रंजना जांगिड़ जोधपुर में इस कला को सहेज रही है। रंजना की बनाई वुडकट पेंटिंग लाखों रुपए में बिकती है। वह बच्चों व युवाओं को वर्कशॉप के माध्यम से इस कला को सीखा रही हैं।
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आम पेंटिंग से महंगी वुडकट पेंटिंग
प्रिंट मेकिंग में पहले चित्रों को लकड़ी पर उकेरा जाता है, फिर उन्हें दूसरी सतह पर स्याही अथवा अन्य रंगों का उपयोग कर चम्मच की सहायता से रगड़ कर कागज पर उसका इंप्रेशन (छाप) लिया जाता है। इससे सारी कलाकृति उस पर उकेरी जा सके। इसे 24 घंटे सूखने के बाद तैयार किया जाता है। वुडब्लॉक प्रिंट से तैयार वुडकट पेंटिंग की कीमत अन्य पेंटिंग से कहीं गुणा ज्यादा होती है। वुडकट की एक साधारण पेंटिंग तीन से पांच हजार रुपए तक बिकती है।
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उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय से कला विषय में एमए करने वाली रंजना ने पिछले 14 वर्ष में कला के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। शादी के बाद जोधपुर में रहने वाली रंजना पेंटिंग, ग्राफिक, प्रिंटमेकिंग के साथ लकड़ी में स्कल्पचर भी बनाती है। इन्हें फरवरी 2023 में आर्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया मुंबई से बेस्ट प्रिंट मेकिंग वर्क के लिए नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया। वे निशुल्क प्रिंट मेकिंग वर्कशॉप का आयोजन करती हैं। आर्ट एंड क्राफ्ट की कक्षाएं संचालित करने के साथ प्रिंट मेकिंग का निशुल्क प्रशिक्षण भी दे रही हैं।
Published on:
24 Apr 2023 07:00 pm
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