
नारी निकेतनों में विमंदित महिलाओं की बदहाली पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता, सरकार को दिए ये निर्देश
जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नारी निकेतनों में मानसिक विमंदित महिलाओं के लिए स्थायी काउंसलर के पद सृजित करने के संबंध में नियमों में अपेक्षित संशोधन पर विचार करने को कहा है। कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख से पहले नारी निकेतनों में रिक्त पड़े पदों को दक्ष स्टाफ से भरने का आदेश भी दिया है।
न्यायाधीश संदीप मेहता और न्यायाधीश विनीतकुमार माथुर की खंडपीठ ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान पिछले महीने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को राज्य के सभी नारी निकेतनों का निरीक्षण कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। बुधवार को सुनवाई के दौरान न्यायमित्र डॉ.नुपूर भाटी और वंदना भंसाली ने विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिवों द्वारा जोधपुर, उदयपुर, अजमेर, भरतपुर, बीकानेर, जयपुर तथा कोटा में स्थित नारी निकेतनों के निरीक्षण प्रतिवेदनों के आधार पर अपने सुझाव दिए। खंडपीठ ने निरीक्षण प्रतिवेदन की प्रतियां अतिरिक्त महाधिवक्ता फरजंद अली को देने के निर्देश दिए और उन्हें सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित करने को कहा कि सरकार निरीक्षण प्रतिवेदनों में उल्लेखित कमियों को दूर करते हुए आवश्यक सुधार करे।
खंडपीठ ने जताई चिंता
खंडपीठ ने कहा कि लगभग सभी नारी निकेतनों में विक्षिप्त महिलाएं रह रही हैं। ऐसी महिलाओं की काउंसलिंग के लिए पूर्णकालिक काउंसलर होना जरूरी है और यह उनका मौलिक अधिकार है, जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सुनिश्चित किया गया है। खंडपीठ ने कहा कि नारी निकेतनों में आवश्यकता के आधार पर काउंसलर्स को बुलाया जाता है, जिसे उचित नहीं ठहराया जा सकता। खंडपीठ ने पाया कि काउंसलर का कोई नियमित पद ऐसे व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए बनाए गए नियमों में उल्लेखित नहीं है। जबकि ऐसी मानसिक विमंदित महिलाओं के मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए उनको दक्ष काउंसलर्स उपलब्ध करवाया जाना आवश्यक है।
केवल आवश्यकता के आधार पर काउंसलर को बुलाने से इनकी समस्या का समाधान संभव नहीं है, क्योंकि ऐसी महिलाओं को सहानुभूति के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक मदद की बहुत आवश्यकता रहती है। खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि वह राज्य के सभी नारी निकेतनों में महिला काउंसलर के स्थायी पद सृजित करने के लिए नियमों में अपेक्षित संशोधन पर विचार करे। सुनवाई की अगली तिथि 15 मई मुकर्रर की गई है।
Published on:
11 Apr 2019 10:31 am
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