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हमें बताएं, सीज इमारतें खोलने का फरमान कौन देता है : कोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने पार्किंग की कमी होने पर सीज बहुमंजिला आवासीय एवं वाणिज्यिक इमारतों को खोलने पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे फरमान कौन देता है, हमें उसका नाम बताओ। निजी बसों के गैर अधिसूचित क्षेत्रों से संचालन पर पुलिस की सख्ती का मामला ध्यान में लाए जाने पर कोर्ट ने फिलहाल कोई हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि लिखित में प्रार्थना पत्र पेश करने पर सुना जाएगा।

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हमें बताएं, सीज इमारतें खोलने का फरमान कौन देता है : कोर्ट

जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने पार्किंग की कमी होने पर सीज बहुमंजिला आवासीय एवं वाणिज्यिक इमारतों को खोलने पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे फरमान कौन देता है, हमें उसका नाम बताओ। निजी बसों के गैर अधिसूचित क्षेत्रों से संचालन पर पुलिस की सख्ती का मामला ध्यान में लाए जाने पर कोर्ट ने फिलहाल कोई हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि लिखित में प्रार्थना पत्र पेश करने पर सुना जाएगा। याचिका पर दिशा-निर्देश देने के लिए कोर्ट ने मामला सुरक्षित रख लिया है।

वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा तथा न्यायाधीश विनित कुमार माथुर की खंडपीठ में याचिकाकर्ता रवि लोढ़ा की ओर से दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान अवैध बहुमंजिला इमारतों का मामला उठा। याची के अधिवक्ता अशोक छंगाणी ने यह मामला उठाया, जिस पर नगर निगम के अधिवक्ता राजेश पंवार ने कहा कि पूर्व में कोर्ट में ऐसी इमारतों की सूची पेश की जा चुकी है। इन इमारतों को सीज किया गया था, जिनमें से कुछ को सीज मुक्त किया गया। इस पर खंडपीठ ने हैरानी जताई कि सीज इमारतों को खोलने का आदेश कौन दे रहा है? पंवार ने स्पष्ट किया कि जिन कमियों के आधार पर इमारतें सीज की गई थी, उन्हें दुरुस्त करने वाली इमारतों को कानूनी प्रावधानों के तहत सीज मुक्त किया गया है। हालांकि, छंगाणी ने ऐतराज जताते हुए कहा कि अब भी ऐसी इमारतों की कमी नहीं है।

निजी बसों के संचालन में परेशानी
सुनवाई के दौरान निजी बस संचालन को लेकर कोर्ट में दो पक्ष रखे गए। एक अधिवक्ता ने कहा कि कुछ बस ऑपरेटर्स केवल शादी, समारोह व पर्यटकों को घुमाने का कार्य करते हैं और उनकी स्वयं की पार्किंग हैं, लेकिन पुलिस उन्हें अब संचालन नहीं करने दे रही। जबकि अब पर्यटन सीजन शुरू हो चुकी है। एक अन्य पक्षकार की ओर से कहा गया कि पुलिस सख्ती कर रही है। इस पर कोर्ट ने लिखित में प्रार्थना पत्र पेश करने को कहा, लेकिन यह स्पष्ट किया कि कोर्ट ने केवल यही कहा था कि गैर अधिसूचित क्षेत्रों सेे बसों का संचालन नहीं होना चाहिए। अधिसूचित क्षेत्रों से बस संचालन पर किसी को ऐतराज नहीं होना चाहिए।