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रमजान : मैंने रोजा रख लिया मौला की रहमत हो गई

Ramzan 2018रमजान का महीना बड़ा बरकतों का है। पूरी दुनिया के साथ जोधपुर में भी रोजेदार रोजे रख रहे हैं।

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जोधपुर

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MI Zahir

May 23, 2018

Ramzan 2018

Ramzan 2018

जोधपुर . रहमतों व बरकतों का महीना रमजान शुरू हुए करीब एक हफ्ता हो चुका है । इस बार बहुत तेज गर्मी पड़ रही है, लेकिन रोजेदारों के हौसले बुलंद हैं। वे पूरी अकीदत और हिम्मत के साथ रोजे रख रहे हैं। हर तरफ रमजान की रौनकें- रमजान की बहारें नजर आ रही हैं। रोजेदार सुबह ३ बजे उठ कर रोजे रख रहे हैं। रोजेदार अलसुबह सेहरी कर तिलावत करने के बाद फज्र की नमाज़्ा पढ़ते हैं। उसके बाद उनका पूरा दिन इबादत में ही गुजर रहा है।

इफ़्तारी की तैयारियां

रोजेदार दोपहर जुहर और शाम को अस्र की नमाज़ पढ़ते हैं। उसके बाद इफ़्तारी की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बाजारों में फलों की बिक्री तेज हो जाती है और घरों में महिलाएं इफ्तारी पकाना शुरू कर देती हैं। उसके बाद रोजेदार पुरुष मस्जिदों या घरों में रोजा खोलते हैं। उसके बाद वे मगरिब की नमाज पढ़ते हैं। रोजेदार रात की अंतिम और पांचवीं नमाज इशा की 17 रकात नमाज के बाद 20 रकात तरावीह की विशेष नमाज पढ़ते हैं। इसमें कुरान शरीफ पढ़ा जाता है। रोज रात को यही क्रम चलता है।

नमाज और तरावीह
रमजान का महीना खत्म होने और ईद से पहले हर रात तरावीह की विशेष नमाज पढ़ी जाती है। इसे यंू समझ सकते हैं कि रमजान के महीने में अंतिम नमाज सबसे बड़ी और अधिक समय वाली होती है। हालांकि आम तौर पर हर मस्जिद में इमाम पांचों नमाज पढ़ाते हैं, लेकिन तरावीह की विशेष नमाज कुरान हाफिज ही पढ़ाता है। जिस इबादतगुजार को पूरा कुरान कंठस्थ होता है उसे हाफिज क हते हैं।

रोजा और रोजेदार

रोजों के दौरान रोजेदार सुबह ३ बजे उठ कर सेहरी करते हैं यानि भोजन पानी आदि का सेवन करते हैं। सुबह फज्र की नमाज से पहले तक तयशुदा वक्त तक सेहरी का समय होता है। रोजेदार पूरे दिन निराहार और निर्जल रहते हैं और किसी तरह की गंध से भी बचते हैं। वहीं सभी रोजेदार पूरे दिन पांच वक्त नमाज पढ़ते और कुरान शरीफ की तिलावत करते हैं। रोजेदार दिन की चौथी और सूर्यास्त के बाद होने वाली मगरिब की नमाज से फौरन पहले तयशुदा समय पर खजूर से रोजा खोलते हैं। इस दौरान जितना समय होता है उसके अनुरूप शरबत शिकंजी या रसीले फलों का जल्दी से सेवन करते हैं।

मगरिब की नमाज

इसके तत्काल बाद मगरिब की नमाज अदा की जाती है। वे नमाज के बाद केवल रात तक कभी भी खाना खा सकते हैं। इसके बाद इशा की नमाज अदा की जाती है और तरावीह की विशेष नमाज पढ़ी जाती है।आधी रात के बाद रोजे के लिए जगाने का इंतजामरोजेदारों को रात को जगाने के लिए एक महीने तक विशेष इंतजाम किया जाता है। स्थानीय स्तर पर हर मुस्लिम बहुल इलाक़े में एक-एक व्यक्ति सेहरी के वक़्त जगाने के लिए पहुंचता है। इस दौरान लोग घड़ी, मोबाइल व दूसरे साधनों से भी एक दूसरे को जगाने का इंतजाम किया गया है।

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सेहरी और इफ्तारी के समय छूटता है गोला
रमज़ान के दौरान मस्जिदों व रोजेदारों के आसपास के इलाकों में तड़के सेहरी का वक्त $खत्म होने व शाम को रोज़ा इफ़्तारी का समय शुरू होने पर कई स्थानों पर एक बड़ा गोला (तेज आवाज़ करने वाला एक पटाखा) छोड़ा जाता है। दूरदराज़ के एेसे स्थान, जहां आवाज नहीं जाती, वे दोनों वक़्त मस्जिद या किसी ऊंची इमारत पर लाइट जला कर या मस्जिदों में माइक से एेलान कर इसकी सूचना देेते हैं।

महिलाओं की दिनचर्या

पूरे दिन महिलाआंे की दिनचर्या अधिक प्रभावित रहती है। वे अलसुबह 3 या 3.30 बजे उठ कर रोजेदारों केलिए खाना बनाती हैं और सेहरी करवाती हैं और खुद सेहरी करवाती हैं। इसी प्रकार शाम चार बजे बाद से ही इफ्तारी बनाने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।
- एम आई जाहिर