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जोधपुर

Jodhpur: बरसाती नाले में बह रहा 65 साल का शोध

काजरी के बेर के अब तक 250 पौधे तबाह बरसाती नाले में हर साल 35 एकड़ की शोध फसल प्रभावित नगर निगम ने देश के सबसे बड़े मरुस्थलीय शोध संस्थान काजरी में से निकाला नाला पिछले मानसून में टिश्यू कल्चर से उगाए गए खजूर के 17 पौधे नष्ट हुए

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गजेंद्रसिंह दहिया

जोधपुर. नगर निगम की ओर से केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) में से सीवरेज का नाला निकालने से हर साल 35 एकड़ क्षेत्रफल में उगाई गई शोध फसलों के परिणाम प्रभावित हो रहे हैं। मूंग, मोठ, ग्वार, बेर और खूजर की फसलें नष्ट हो रही हैं। प्रयोगशाला में टिश्यू कल्चर तकनीक से उगाए गए खजूर के 150 पौधों में से 17 पौधे पिछले साल तबाह हो गए। पिछले दस साल में खजूर के 35 पौधे और बेर के 250 पौधे नष्ट हो चुके हैं। मूंग, मोठ व ग्वार की फसल भी बर्बाद हो रही है। काजरी के अंदर सीवरेज का नाला निकाल कर जोधपुर ने 65 साल के मरुस्थलीय शोध कार्यों को संकट में डाल दिया है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने देश में मरुस्थलीय कृषि, वानिकी, बागवानी, जलवायु, पशुपालन और ऊर्जा तकनीक पर समन्वित शोध के लिए 1952 में काजरी की स्थापना की थी। काजरी मरुस्थलीय शोध करने वाला देश में एकमात्र संस्थान ही है। काजरी के 528 एकड़ क्षेत्रफल में से 167 एकड़ जमीन एम्स को देने से वैज्ञानिकों को वहां से अपने शोध खेत हटाने पड़े। अब 35 एकड़ में बरसात व सीवरेज का पानी भरने से यहां भी शोध कार्य बंद होने के कगार पर पहुंच गया है।

 

यह है समस्या
काजरी के पास स्थित मिल्कमैन कॉलोनी ढलान पर बसी हुई है। वहां हर साल मानसून में बरसात का पानी भर जाता था। इससे निजात दिलाने के लिए नगर निगम ने 2007 में कॉलोनी से काजरी के अंदर होते हुए सुभाषनगर तक सीवरेज लाइन डाल दी, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। सीवरेज लाइन छोटी होने से मानसून के समय पानी पूरी मिल्कमैन कॉलोनी में भर जाता है। कॉलोनीवासी हर साल काजरी की दीवार तोड़ देते हैं और सीवरेज व बरसात का पानी काजरी परिसर में खेतों में घुस जाता है। वाटर लॉगिंग होने से सीवरेज पानी के साथ आए लैड, आर्सेनिक, एंटीमनी, तांबा, लोहा और सल्फर जैसी धातु-अधातु फसलों में प्रवेश कर जाते हैं। कुछ फसलें नष्ट हो जाती हैं तो कुछ में अपेक्षित परिणाम नहीं आ पाते।


एक पौधा 3 हजार का

काजरी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एके कौल ने बताया कि उन्होंने 4 साल तक प्रयोगशाला में दिन-रात मेहनत कर खजूर की नई किस्म विकसित की। एक पौधे की कीमत 3 हजार रुपए है। पिछले साल 17 पौधे नष्ट होने से डॉ. कौल अवाक रह गए। कौल कहते हैं कि सीरिया से लाए गए 18 पौधे अलग जगह रोपे गए हैं, अन्यथा वे भी तबाह हो जाते। बेर के पौधों पर शोध करने वाले डॉ. अकथसिंह कहते हैं कि लोग काजरी को बेर के नाम से जानते हैं लेकिन गंदे पानी में बेर की कई किस्में नष्ट होने लगी हैं।

हमारी रिसर्च बह रही

मिल्कमैन कॉलोनी के लोग हर साल दीवार तोड़ कर पानी काजरी में छोड़ देते हैं। मेरे ऑफिस के पास एक फीट तक पानी भरा रहता है। हम खुद ही पानी बाहर निकाल कर दीवार ठीक करते हैं। हमारे शोध कार्य बरसाती पानी में बह रहे हैं। आने वाले समय में फसलों पर शोध प्रभावित हुआ तो भविष्य में बढ़ती जनसंख्या के लिए अन्न का संकट उत्पन्न हो जाएगा।
-डॉ. ओपी यादव, निदेशक, काजरी जोधपुर

 

बजट आते ही नया नाला बनाएंगे

मैं खुद काजरी जाकर आया हूं। हमने यह काम प्रक्रिया में रखा है। इसके लिए बड़े बजट की जरूरत है। जैसे ही बजट आएगा, हम नया नाला बना देंगे।
-घनश्याम ओझा, महापौर जोधपुर