
महिला पर्यवेक्षक भर्ती का संशोधित परिणाम निरस्त
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने महिला पर्यवेक्षक (आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कोटा) पद पर सीधी भर्ती प्रक्रिया के संशोधित परीक्षा परिणाम को निरस्त कर दिया है। राजस्थान स्टाफ सलेक्शन बोर्ड द्वारा जारी मूल परिणाम बहाल हो गया है।
वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा तथा न्यायाधीश रामेश्वर व्यास की खंडपीठ ने अपीलार्थी सुखवीर कौर व अन्य की ओर से दायर अपीलों की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। सोमवार को निर्णय सुनाते हुए खंडपीठ ने एकलपीठ के 3 मार्च के आदेश को अपास्त कर दिया, जिसके खिलाफ विशेष अपीलें दायर की गई थी। सलेक्शन बोर्ड ने इस भर्ती प्रक्रिया के लिए 1 अक्टूबर, 2018 को विज्ञापन जारी किया था। इसके अनुसार सीधी भर्ती लिखित परीक्षा के नतीजों पर निर्भर थी। अपीलार्थियों की ओर से अधिवक्ता बीएस संधू ने कहा कि लिखित परीक्षा के लिए योजना निर्धारित की गई थी, जिसके अनुसार दो सौ अंकों के प्रश्न पत्र में हिन्दी के लिए 50, अंग्रेजी एवं गणित के लिए 25-25 अंक, पोषण व स्वास्थ्य ज्ञान के लिए 65 अंक तथा शिशु की प्रारंभिक देखभाल विषय के 35 अंक के सवाल पूछे जाने थे। उन्होंने कहा कि प्रश्न पत्र तैयार करने वाले ने मूल योजना की अनदेखी करते हुए 150 अंक का प्रश्न पत्र बनाया, जिसमें पांचों विषयों के समान 30-30 अंक के सवाल शामिल कर दिए गए। इसके आधार पर हुई परीक्षा का मूल परिणाम भी जारी कर दिया गया, जिसे कुछ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट की एकलपीठ में चुनौती दी, जिस पर बोर्ड ने प्रत्येक विषय के प्रश्नों का आनुपातिक रूप से अंक भार बदलते हुए परिणाम को संशोधित कर दिया और दावा किया कि इस तरह विषयों के कुल अंक परीक्षा की निर्धारित योजना के अंकों के बराबर कर दिए गए हैं। इससे मूल परिणाम बदल गया, जिसे विशेष अपील में चुनौती देते हुए संधू ने कहा कि यह न्यायोचित नहीं है और विधि की समता के अनुरूप भी नहीं है। कार्ट ने सुनवाई के बाद संशोधित परिणाम निरस्त कर दिया है। अब मूल परिणाम फिर से बहाल हो गया है।
Published on:
12 Oct 2020 07:32 pm
