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RGHS Scame : एम्स-निजी अस्पताल के डॉक्टर की मिलीभगत से घोटाला, बदले में देता था कमीशन

- आरजीएचएस कार्ड से करोड़ों के घोटाले का मामला, रिमाण्ड पर चल रहे दवा दुकानदार ने पूछताछ में की अनेक स्वीकारोक्ति- घर के कमरे की तलाशी में 35 किलो चांदी व 8.20 लाख रुपए जब्त, सहकारी उपभोक्ता भण्डार व आइवीएफ सेंटर की दो दर्जन मोहरें मिलीं

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RGHS Scame : एम्स-निजी अस्पताल के डॉक्टर की मिलीभगत से घोटाला, बदले में देता था कमीशन

RGHS Scame : एम्स-निजी अस्पताल के डॉक्टर की मिलीभगत से घोटाला, बदले में देता था कमीशन

जोधपुर।
आरजीएचएस कार्ड से करोड़ों रुपए के दवा घोटाले के मामले में रिमाण्ड पर चल रहे दवा दुकानदार ने बासनी थाना पुलिस की पूछताछ में अनेक खुलासे किए हैं। एम्स व निजी अस्पताल के कुछ चिकित्सक की मिलीभगत से उसने आरजीएचएस कार्ड से करीब डेढ़-दो करोड़ रुपए की दवाओं के फर्जी बिल उठाना स्वीकार किया है। यह राशि और बढ़ने की आशंका है। उसके घर के बंद कमरे की तलाशी में 35 किलो चांदी और 8.20 लाख रुपए जब्त किए गए हैं। (RGHS SCAM)
थानाधिकारी जितेन्द्रसिंह ने बताया कि प्रकरण में जालोरी गेट के भीतर स्थित झंवर मेडिकल एजेंसीज के मालिक लालसागर के आदर्श नगर निवासी जुगल झंवर सात दिन के रिमाण्ड पर है। उससे पूछताछ में निजी अस्पताल के एक डॉक्टर के साथ ही एम्स के कुछ चिकित्सकों से मिलीभगत से घोटाला करना स्वीकार किया है। इन आरोपों की तस्दीक के लिए अब पुलिस इन चिकित्सकों से क्रॉस जांच करेगी।
दुकानदार ने अब तक डेढ़-दो करोड़ का फर्जीवाड़ा कबूला
दवा दुकानदार जुगल ने स्वीकारा कि सरकार की आरजीएचएस योजना शुरू होने के बाद से वह 7-8 करोड़ रुपए की दवाइयां मरीजों को बेच चुका है। इनमें से डेढ़-दो करोड़ रुपए की दवाइयां फर्जीवाड़े से उठाई गई थी। पुलिस को अंदेशा है कि यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। पूछताछ की जा रही है।
डॉक्टरों को मिलता था मोटा कमीशन
आरोपी ने करोड़ों रुपए के घोटाले में चिकित्सकों की पूरी भूमिका होना कबूल कर लिया है। इन्हीं की मिलीभगत से आरजीएचएस कार्ड से फर्जी दवाइयों के बिल बनाकर भुगतान उठाया जाता था। इसके बदले डॉक्टरों को मोटा कमीशन और हिस्सा दिया जाता था।
दुकान में दवाइयों का आज होगा भौतिक सत्यापन
आरजीएचएस के संयुक्त परियोजना निदेशक डॉ. अभिषेक सिंह किलक ने 44 कार्ड धारकों के साथ ही दवा दुकानदार व अन्य के खिलाफ करोड़ों रुपए की दवाइयों के घोटाले का मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने दुकान की तलाशी लेकर सील कर दी थी। मकान में आरोपी का निजी कमरा भी सील किया गया था। कमरा खोलकर तलाशी ली गई तो बगैर बिल की 35 किलो चांदी व 8.20 लाख रुपए जब्त किए गए।सहकारी उपभोक्ता भण्डार, आइवीएफ सेंटर व कुछ अन्य निजी अस्पताल की मोहरें भी जब्त की गईं हैं। जिनके फर्जी होने की आशंका है। इन्हें जब्त किया गया है। अब पुलिस और औषधी नियंत्रण विभाग के अधिकारी शनिवार को दुकान में दवाइयों का भौतिक सत्यापन करेंगे। आरजीएचएस लागू होने के बाद से कितनी दवाइयां खरीदी गई थी और इनमें से कितनी दवाइयां बेच दी गईं। साथ ही वर्तमान में दवाइयों का कितना स्टॉक है। इससे घोटाले की और परतें सामने आ सकती हैं।