
AIIMS: 20 सेमी की जगह 8 मिमी चीरा लगाकर पिताशय कैंसर की रोबोटिक सर्जरी
जोधपुर. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जोधपुर में पिताशय कैंसर से ग्रसित एक मरीज की मिनिमल इनवेसिव विधि यानी रोबोटिक सर्जरी करके पिताशय व लीवर का एक हिस्सा हटाकर मरीज को राहत दी गई। सर्जरी में 20 सेंटीमीटर चीरे की जगह 8 मिलीमीटर आकार के चार छेद किए गए। मरीज ने दूसरे दिन ही मुंह से खाना शुरू कर दिया। दो दिन में उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। पिताशय कैंसर की रोबोटिक से सर्जरी का राजस्थान में यह पहला मामला है।
एम्स जोधपुर के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर व एचओडी डॉ वैभव वार्ष्णेय के नेतृत्व में जालोर निवासी 61 वर्षीय सज्जन की पूर्ण रूप से रोबोटिक रेडिकल कोलेसिस्टेक्टोमी सर्जरी की गई। सर्जरी करीब 3:30 घंटे तक चली। मरीज अब जल्द ही कैंसर कीमोथेरेपी ले सकता है। एम्स आहार नाल, पेट, लीवर, अग्न्याशय, छोटी और बड़ी आंत के कैंसर के लिए भी ऐसी सर्जरी कर रहा है।
80 फ़ीसदी मामलों में पथरी जिम्मेदार
पिताशय कैंसर का सबसे आम कारण पिताशय की पथरी है जो लगभग 80 फ़ीसदी मरीज में देखी जाती है। इसके अलावा वृद्धावस्था विशेष रूप से वृद्ध महिलाएं, मोटापा और धूम्रपान जिम्मेदार है।
पेट के दाहिने हिस्से में होता है दर्द
पित्ताशय का कैंसर दुनिया भर में एक बहुत ही घातक और तेजी से फैलने वाली बीमारी है। प्रारंभिक अवस्था में पित्ताशय के कैंसर के लक्षण अस्पष्ट होते हैं। इसका एक सामान्य लक्षण पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में दर्द होना है। मरीजों को भोजन के प्रति अरुचि, वजन कम होना, उल्टी और आंखों का पीलापन भी लक्षण होते हैं।
इस टीम ने की सर्जरी
मुख्य सर्जन डॉ. वैभव वार्ष्णेय के नेतृत्व में सहायक सर्जन: डॉ. सेल्वाकुमार बी, डॉ. सुभाष सोनी, डॉ. पीयूष वार्ष्णेय, डॉ. लोकेश अग्रवाल, रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. विशु, डॉ. कौशल, डॉ. साई कृष्णा, डॉ. संजमजोत, एनेस्थेटिस्ट डॉ. निखिल कोठारी के अलावा रवि व रामजीवन शामिल थे।
Published on:
11 Oct 2023 08:49 pm

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