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आरटीआई को नजरअंदाज करना सीएमएचओ को पड़ा भारी, आयोग ने लगाई 13 हजार की पैनल्टी

- सीएमएचओ न तो आयोग के सामने उपस्थित हुए, न ही आदेश के बाद दी सूचनाएं

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आरटीआई को नजरअंदाज करना सीएमएचओ को पड़ा भारी, आयोग ने लगाई 13 हजार की पैनल्टी

- 108 और 104 एंबुलेंस के संबंध में मांगी थी सूचनाएं

जोधपुर. सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई सूचनाओं को नजरअंदाज करना सीएमएचओ को भारी पड़ गया। आवेदनकर्ता को सूचनाएं नहीं देने पर सूचना आयोग ने लोक सूचना अधिकारी सीएमएचओ डॉ. एसएस चौधरी पर 13 हजार रुपए की पैनल्टी लगाई है। इससे पहले भी कई बार सीएमएचओ पर पैनल्टी लगाई जा चुकी है, फिर भी आवेदनकर्ता को सूचनाएं नहीं दी गई। उधर, चिकित्सा विभाग की मानें तो समय पर सूचना नहीं देने पर पैनल्टी भरने के जिम्मेदार ठेका कंपनी और डीपीएम है, जबकि आरटीआई एक्ट के अनुसार समय पर सूचनाएं नहीं देने पर पैनल्टी भरने के लिए लोक सूचना अधिकारी ही जिम्मेदार होता है। पहाडग़ंज द्वितीय निवासी श्यामसुंदर साद ने 108 और 104 एंबुलेंस के संबंध में 5 सितंबर 2016, 9 सितंबर 2016, 2 जनवरी 2017, 16 जनवरी 2017 को आरटीआई आवेदन प्रस्तुत कर दो-दो बिंदुओं की कुछ सूचनाएं मांगी थी। सीएमएचओ ने ये सूचनाएं नहीं दी। आखिरकार 31 मई को मामला सूचना आयोग में पहुंचा। आयोग ने सीएमएचओ को सूचनाएं नहीं देने का दोषी माना। सूचनाओं के अलग-अलग आवेदन पर 13 हजार रुपए की पैनल्टी भी लगाई। सीएमएचओ को पैनल्टी चुकाने के लिए 15-20 दिन का समय दिया गया है। हैरानी की बात तो यह है कि चाही गई सभी सूचनाएं महज दो-दो बिंदुओं की थी।

तो बच जाते पैनल्टी से

मई में पांच सूचनाओं के जवाब लेकर सीएमएचओ को आयोग के सामने पेश होना था। सीएमएचओ ने आयोग के आदेशों को नजरअंदाज करते हुए न तो जवाब भेजे और न ही खुद उपस्थित हुए। एक दो मामलों में प्रतिनिधि के तौर पर अन्य कर्मचारी को भेज दिया।

फिर भी निकाल दिए छह महीने

साद ने 22 जून 2016 को दो बिंदुओं की सूचना मांगी थी। इस पर सुनवाई के पहले सूचना आयोग ने सीएमएचओ को दो बार नोटिस भेजे। फिर भी कोई उपस्थित नहीं हुआ, तो आयोग ने सीएमएचओ पर दो हजार रुपए की पैनल्टी लगाई। साथ ही 15 दिन में सूचना देने के आदेश दिए। छह महीने बीतने के बाद भी सीएमएचओ ने आवेदक को सूचना नहीं दी।

डीपीएम या ठेका कंपनी जिम्मेदार

सूचनाएं नहीं देने के लिए जिम्मेदार ठेका कंपनी और डीपीएम होते हैं। पैनल्टी लगती है, तो उनसे भरवाई जाती है। वैसे भी कोई 100 या 50 पन्नों की सूचनाएं मांगता है, तो सूचना देने से मना कर दस्तावेजों का निरीक्षण करवा देते हैं।
डॉ. एसएस चौधरी, सीएमएचओ, जोधपुर

प्रतिदिन भिजवाते हैं सूचना

कोई व्यक्ति हमसे सीधे तौर पर आरटीआई के तहत सूचना नहीं मांग सकता। जो सूचना होती है, हम प्रतिदिन सीएमएचओ को ऑनलाइन भेजते हैं। हालांकि नियमों में कटौती का प्रावधान है, लेकिन कभी नहीं हुई।
भानू सोनी, कॉर्डिनेटर, जीवीके ईएमआरआई