25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ठाकुरजी को केसर का दूध और गूंदगिरी के लड्डूओं का भोग

पुष्टीमार्गीय परम्परा के कृष्ण मंदिरों में सर्दी के अनुसार ही हो रही सेवा

less than 1 minute read
Google source verification
ठाकुरजी को केसर का दूध और गूंदगिरी के लड्डूओं का भोग

ठाकुरजी को केसर का दूध और गूंदगिरी के लड्डूओं का भोग

जोधपुर. सनातन धर्म में विशेष महत्व वाले पौष मास का समापन 17 जनवरी 2022 को होगा। पिछले माह 20 दिसंबर से शुरू पौष मास में शहर के कृष्ण मंदिरों व पुष्टीमार्गीय परम्परा के मंदिरों में ठाकुरजी की दिनचर्या, पोशाक, मंगला व शयन आरती के समय में बदलाव किया गया है। ठाकुरजी को केसर का दूध और गूंदगिरी के लड्डूओं का भोग लगाने के साथ 'पौष बड़ाÓ आयोजन भी नियमित रूप से जारी है। सभी माह में पौष अत्यंत श्रेष्ठ पुराणों में सभी मासों पौष मास अत्यंत श्रेष्ठ बताया गया है। इसी मास में सूर्य धनु राशि प्रवेश करने से इसे धनु मास भी कहते हैं।

ठाकुरजी को सर्दी ना लगे इसीलिए गर्भगृह के पास में अंगेठी

शहर के विभिन्न कृष्ण मंदिरों में इन दिनों ठाकुरजी को ऋ तु के अनुसार ही भोग लगाया जा रहा है । शृंगार व पौशाक में भी पूरी तरह बदलाव किया गया है । कटला बाजार स्थित कुंज बिहारी मंदिर में देव प्रबोधिनी एकादशी से ही ठाकुरजी की सेवा में आंशिक बदलाव शुरू किया गया लेकिन सर्दी बढऩे के साथ अब ठाकुरजी को उनी व फूलगर तथा गूंदगिरी के लड्डू एवं रात्रि को केसर दूध का भोग लगाया जा रहा है। सर्दी से बचाव के लिए ठाकुरजी के गर्भगृह के पास में अंगेठी भी जलाई जा रही है । प्रतिदिन पौष बड़ों का भोग भी लगाया जा रहा है। मंदिर महंत भंवरदास निरंजनी ने बताया कि मंगला व शयन आरती के समय में भी बदलाव किया गया है। चौपासनी स्थित श्याम मनोहर प्रभु मंदिर, जूनी मंडी स्थित बाल किशन लाल मंदिर, गंगश्यामजी मंदिर, रातानाडा कृष्ण मंदिर आदि कृष्ण मंदिरों में भी ठाकुरजी के नियमित भोग में बदलाव किया गया है।