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संजीवनी क्रेडिट कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी : एक हजार करोड़ जमा कर 11 सौ करोड़ के बोगस ऋण दिखाए, अब बैलेंस शीट शून्य

देश में 1.46 लाख निवेशकों के एक हजार करोड़ रुपए हड़पने वाली संजीवनी क्रेडिट कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी का प्रबंध निदेशक व पूर्व अध्यक्ष विक्रमसिंह व चार अन्य को एसओजी गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन इनसे अभी तक बरामदगी कुछ न होने से हजारों निवेशकों में निराशा ही हाथ लगी है।

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संजीवनी क्रेडिट कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी : एक हजार करोड़ जमा कर 11 सौ करोड़ के बोगस ऋण दिखाए, अब बैलेंस शीट शून्य

जोधपुर. देश में 1.46 लाख निवेशकों के एक हजार करोड़ रुपए हड़पने वाली संजीवनी क्रेडिट कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी का प्रबंध निदेशक व पूर्व अध्यक्ष विक्रमसिंह व चार अन्य को एसओजी गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन इनसे अभी तक बरामदगी कुछ न होने से हजारों निवेशकों में निराशा ही हाथ लगी है। सोसायटी की बैलेंस शीट शून्य दिखाई जा चुकी है। ऐसे में निवेशकों को अपनी गाढ़ी कमाई वापस मिलना मुश्किल नजर आ रहा है। यही वजह है कि कुछ निवेशक अब ईडी में शिकायत करने की तैयारी में है।

निवेशक पिंकी अग्रवाल ने गत 20 सितम्बर को एसओजी में संजीवनी क्रेडिट कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी के खिलाफ बयान दर्ज कराए थे। पिंकी ने निवेशकों की राशि लौटाने के बारे में बात की तो एसओजी अधिकारियों ने अवगत कराया कि विक्रम सिंह ने एक हजार रुपए जमा कर ग्यारह सौ करोड़ रुपए के बोगस ऋण बताए हैं। सोसायटी की बैलेंस शीट शून्य कर दी गई है। जबकि फर्जी लोगों के नाम पर ग्यारह सौ करोड़ रुपए ऋण से कई अन्य कम्पनियां खोल ली गईं। देश ही नहीं विदेश में सम्पत्तियां खड़ी की जा चुकी है। विदेश में फार्म हाउस खरीद लिए गए हैं।

निजी कम्पनी में कार्य करने वाली पिंकी ने बताया कि एसओजी ने एफआइआर दर्ज कर मुख्य आरोपी व अन्य को गिरफ्तार किया है। विक्रमसिंह रिमाण्ड पर है। निवेशकों को राशि वापस मिलेगी या नहीं इस पर असमंजस है। अब ईडी के दिल्ली स्थित मुख्यालय अथवा जयपुर में शिकायत की जाएगी।

घर खर्च व मकान का किराया देना भी मुश्किल हुआ
पिंकी अग्रवाल ने बताया कि वर्ष 2017 से अब तक सोसायटी में 22 लाख रुपए निवेश कर चुकी है। वो वृद्ध माता-पिता व एक बहन के साथ किराए के मकान में रहती है। भाई का निधन हो चुका है। परिपक्व होने के बाद मिलने वाली राशि से खुद का मकान खरीदने का सपना संजोए हुए थे। खुद व बहन की शादी भी करनी है। मां दिल की मरीज हैं। सोसायटी में राशि डूबने से मां का इलाज व घर खर्च चलना मुश्किल हो गया है। पापड़ का व्यवसाय करने वाले पिता व घरवालों की 20 बीस साल की जमा पूंजी डूब चुकी है। घर का किराया देना मुश्किल हो गया है। घर-खर्च के लिए उधार लेकर काम चलाना पड़ रहा है।