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सरदारपुरा हादसा : बिखरे आशियाने में ढूंढ रहे जिंदगीभर की कमाई

- मलबे के पास ही बिताई रात- आसरे के लिए पड़ोसी के घर ली शरण

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दिनभर मलबे में दबे सामान को निकालने की मशक्कत करते रहे।

जोधपुर . तिनका-तिनका जोडक़र जो आशियाना खड़ा किया, वह एक झटके में ही ढह गया। भगवान का शुक्र कि जिंदगी बच गई। अब सबसे बड़ा प्रश्न अपनी आगे की जिंदगी बसर करने का है। मलबे में अपनी जमा पूंजी को ढूंढने के लिए दो दिन से परिवार के लोग लगे हुए हैं। यह कहानी है सरदारपुरा बी रोड पर भरभराकर गिरी तीन मंजिला इमारत में रहने वाले परिवार की।
हादसे की चश्मदीद रही और बाल-बाल बची मधु अब तक सहमी हुई हैं। जब भी कोई हादसे के बारे में पूछता है तो आंखों के सामने खौफनाक मंजर दौड़ जाता है और आंसू छलक पड़ते हैं। उनके पति चंद्रकात भूतड़ा हादसे के समय अपने काम पर गए हुए थे। चंद्रकांत अब अपने ध्वस्त हुए मकान के पास टैंट लगाकर बैठे हैं। वह दिनभर मलबे में दबे सामान को निकालने की मशक्कत करते रहे।

रात सडक़ पर बिताई
मलबे में दबे सामान को ढंूढने के लिए मंगलवार देर रात से ही परिवार के सदस्य और रिश्तेदार लगे रहे। मधु ने बताया कि वह रातभर सडक़ पर ही बैठी रही। इसके बाद पड़ोसी भगवतीलाल प्रजापत के परिवार ने शरण दी। पहनने के लिए कपड़े और रहने के लिए एक कमरा भी दिया है।

कुछ मिनट पहले ही प्रेस कर रही थी मधु

तीन मंजिला इमारत का जो हिस्सा ढहा, वहां हादसे के कुछ मिनट पहले ही मधु कपड़ों को प्रेस कर रही थी। चंद देर के लिए वह मकान के पिछले हिस्से में गई। तभी इमारत भरभरा कर गिर गई। मधु यह बताते हुए भावुक हो उठी कि वह वहां से नहीं जाती तो आज जिंदा नहीं होती। हादसे के समय पुत्र और पति घर पर नहीं थे।

सोने में लगाई कमाई अब ढूंढ रहे

परिवार के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने जिंदगीभर की कमाई से कुछ सोना खरीदा, जो घर में रखा था। जेवरात भी रखे हुए थे। परिवार के सदस्य मलबे में अब जेवरात ढूंढ रहे हैं।

कुछ दिन आसरा मिलेगा फिर क्या करेंगे

परिवार ने कहा कि स्थायी आसरा अब कौन देगा। कितने दिन पड़ोसी के यहां रहेंगे। घर ढह गया और जब तक सरकार से मदद नहीं मिलती, हम यहीं अपने आशियाने के मलबे के किनारे सडक़ पर ही रहेंगे।