सिविल सर्विस परीक्षा में नेत्रहीनों को अपेक्षित आरक्षण नहीं देने पर जवाब मांगा

राजस्थान हाईकोर्ट

By: rajesh dixit

Published: 06 Jan 2021, 05:56 PM IST

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने सिविल सर्विस परीक्षा में नेत्रहीन अभ्यर्थियों के लिए रिक्तियों के लिहाज से अपेक्षित एक प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान सुनिश्चित नहीं करने पर संघ लोक सेवा आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
न्यायाधीश अरुण भंसाली की एकलपीठ में याचिकाकर्ता अलीअसगर बोहरा की ओर से अधिवक्ता सुरेन्द्र थानवी ने कहा कि याची नेत्रहीन अभ्यर्थी है, जो माध्यमिक से लेकर स्नात्कोत्तर तक प्रतिभावान छात्र रहा है। संघ लोक सेवा आयोग ने 12 फरवरी, 2020 को 796 रिक्तियों के लिए सिविल सर्विस परीक्षा अधिसूचित की थी, जिसके तीन चरण है-प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार। थानवी ने कहा कि प्रत्येक चरण के लिए आरक्षण प्रभावी करना बाध्यकारी है। उन्होंने कहा कि दिव्यांग जनों के लिए अधिकार अधिनियम के तहत भर्तियों में 4 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान होना जरूरी है, जिसमें से एक प्रतिशत आरक्षण नेत्रहीन या दृष्टिबाधित लोगों के लिए हैं। जबकि लोक सेवा आयोग ने दिव्यांगों के लिए केवल 24 पद ही आरक्षित किए, जिनमें भी नेत्रहीन या दृष्टिबाधितों के लिए मात्र 3 रिक्तियां प्रस्तावित की गई। जबकि यह अपेक्षित एक प्रतिशत पद आरक्षित रखने के प्रावधानों के विपरीत है। आयोग ने इस आधार पर प्रारंभिक परीक्षा का नतीजा घोषित किया, जिसके अनुसार कुल रिक्तियों के 12 से 13 गुना अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया जाता है। नेत्रहीन अभ्यर्थियों का आरक्षण नियमानुसाा प्रभावी नहीं करने से याचिकाकर्ता का नाम सूची में नहीं आ पाया, जिसे चुनौती देने पर कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

rajesh dixit Desk
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