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Sheetla Mata – इस मां के दरबार में बच्चों का शीश नवाने उमड़ते है लोग, आरोग्य और सुख का मिलता है वरदान

Sheetla Mata - बच्चों में माता निकलने यानि चेचक की बीमारी के बाद यहां माता के मंदिर में बच्चों को ढोक लगवाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।- शीतला माता मंदिर में 24 मार्च को ध्वजारोहण समारोह - शीतला माता को भोग लगाने के लिए घरों में बनेगा ठंडा

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Sheetla Mata - इस मां के दरबार में बच्चों का शीश नवाने उमड़ते है लोग, आरोग्य और सुख का मिलता है वरदान

Sheetla Mata - इस मां के दरबार में बच्चों का शीश नवाने उमड़ते है लोग, आरोग्य और सुख का मिलता है वरदान

Sheetla Mata - नागौरीगेट के बाहर कागा क्षेत्र स्थित शीतला माता मंदिर परिसर में भरने वाले ऐतिहासिक मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई है। बच्चों को चर्म संबंधी बीमारियों से संरक्षण की मनौति से जुड़ा शीतलाष्टमी मेला इस बार चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी 24 मार्च को शाम 4.30 बजे ध्वजारोहण के साथ शुरू हो जाएगा। शीतला माता मेले का उद्घाटन राजस्थान राज्य पशुधन विकास बोर्ड के अध्यक्ष राजेन्द्रसिंह सोलंकी, नगर निगम (उत्तर) क्षेत्र की महापौर कुन्ती परिहार, राज्य मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रमेश बोराणा, नगर निगम (दक्षिण) क्षेत्र महापौर वनिता सेठ व जसवन्तसिंह कच्छवाहा समाज सेवी एवम् ट्रस्टी भारत सेवा संस्थान के मुख्य आतिथ्य में किया जाएगा। समारोह की अध्यक्षता राज्य सभा सांसद राजेन्द्र गहलोत करेंगे। शीतला माता (कागा तीर्थ) ट्रस्ट के अध्यक्ष निर्मल कछवाह ने बताया कि गाजे बाजों के साथ प्रथम पूज्य गणेश व माता शीतला के पूजन के बाद मंदिर शिखर पर ध्वजारोहण किया जाएगा।

सुगम दर्शन की रहेगी व्यवस्था
अष्टमी तिथि के दिन घरों में भी शीतला माता, ओरी माता, अचपड़ाजी एवं पंथवारी माता का प्रतीक बनाकर पूजन किया जाएगा। शीतला माता मेला अधिकारी कुलदीप गहलोत ने बताया कि मंदिर ट्रस्ट की ओर से इस मेले के दौरान दर्शनार्थियों के सुगम दर्शन की व्यवस्था की गई है। शीतला माता मंदिर मेले के दौरान 24 घंटे खुला रहेगा।

रसोईघरों में कल अवकाश
शहर के रसाेईघरों में शुक्रवार अष्टमी को अवकाश रहेगा। शीतला अष्टमी के एक दिन पूर्व गुरुवार को घरों में अलग-अलग व्यंजन बनाए जाएंगे। खासतौर पर करबा, राब, पंचकूटे की सब्जी, मठरी, दहीबड़े, कांजी- बड़े , मीठी नमकीन पुड़ियां आदि व्यंजनों को मां शीतला, ओरीमाता, अचपड़ाजी एवं पंथवारी माता पूजन एवं भोग के बाद शुक्रवार को बतौर प्रसादी के रूप में ग्रहण की जाएगी। उल्लेखनीय है इस दिन जोधपुर सहित मारवाड़ के अधिकांश घरों में चाय तक का सेवन नहीं किया जाता है ।

इस बार हर आयु वर्ग के लिए झूले
कागा मैदान में शीतला माता के दर्शनार्थियों के लिए हर आयु वर्ग के लिए झूले लगाए गए हैं। आकाश झूला, टॉय ट्रेन व नाव सहित बच्चों के लिए विभिन्न तरह के झूले आकर्षण का केन्द्र रहेंगे।

अष्टमी तिथि 24 मार्च को मध्यरात्रि 12:10 से
चैत्र कृष्ण अष्टमी तिथि 24 मार्च को मध्यरात्रि 12:10 मिनट पर शुरू होगी, जो 25 मार्च को रात 10:04 मिनट तक रहेगी। ऐसे में 25 मार्च को लोकपर्व बास्योड़ा याने ‘ठंडा’ मनाया जाएगा। इस वर्ष शीतला माता के पूजन का पर्व शीतलाष्टमी सुस्थिर योग, मकर राशि में त्रिग्रही योग में मनेगी। इस दिन शीतला माता की पूजा-अर्चना करने के साथ महिलाएं व्रत भी रखेंगी। इसके एक दिन पहले घर-घर महिलाएं शीतलाष्टमी (बास्योड़ा) के लिए भोजन पकवान बनाएगी। शीतलाष्टमी के दिन सुबह माता को ठंडा भाेजन अर्पित कर चेचक आदि बीमारियों से परिवार को बचाने की प्रार्थना की जाएगी।

स्कन्दपुराण में वर्णन
मां शीतला का उल्लेख सर्वप्रथम स्कन्दपुराण में मिलता है। इनका स्वरूप अत्यंत शीतल है और कष्ट-रोग हरने वाली हैं। गदर्भ पर विराजित माता के हाथों में कलश, सूप, झाड़ू और नीम के पत्ते हैं। स्कन्द पुराण में माता शीतला की अर्चना का स्तोत्र 'शीतलाष्टक' के रूप में प्राप्त होता है। ऐसा माना जाता है कि- इस स्तोत्र की रचना स्वयं भगवान शंकर ने की थी। शास्त्रों में भगवती शीतला की वंदना के लिए यह मंत्र बताया गया है।
मंत्र है- वन्देऽहंशीतलांदेवीं रासभस्थांदिगम्बराम्।।
मार्जनीकलशोपेतां सूर्पालंकृतमस्तकाम्।।