वीडियो : मनोज सैन/जोधपुर. दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति और उनके प्रति श्रद्धा से जुड़ा ‘श्राद्ध पक्ष’ शुक्रवार से शुरू हुआ। पहले दिन पूर्णिमा का श्राद्ध मनाया जा रहा है। इस दिन भारतीय कैलेंडर की तिथि अनुसार देवलोक हुए पूर्वजों के नाम पर सगोत्र उच्चारण कर तिल, जौ, कच्चे दूध, पुष्प, डाब के साथ घरों अथवा पवित्र जलाशयों पर तर्पण किया गया। पं. ओमदत्त शंकर ने बताया कि प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध 14 और द्वितीया का श्राद्ध 15 सितम्बर को होगा। सोमवार को द्वितीया तिथि दोपहर 2.35 बजे तक ही होने के कारण इस दिन श्राद्ध नहीं होगा। तृतीया का श्राद्ध 17 सितम्बर, चतुर्थी का श्राद्ध 18 सितम्बर, पंचमी का श्राद्ध 19 सितम्बर को होगा। छठ, सप्तमी, अष्टमी, नवमी व दशमी तिथि का श्राद्ध क्रमश: 20,21, 22, 23,24 सितम्बर को होगा। एकादशी और द्वादशी का श्राद्ध 25 सितम्बर को संयुक्त रूप से होगा। इसके बाद त्रयोदशी, चतुर्दशी और सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध क्रमश: 26, 27 और 28 सितम्बर को मनाया जाएगा। शास्त्रोक्त विधान के अनुसार एक पखवाड़े तक पितृपक्ष के दौरान मांगलिक कार्य टाले जाएंगे।