किसानों को मिलने वाली बिजली हमेशा से ही मुद्दा रही है। बिजली कम मिलना और इसके समय को लेकर हमेशा से ही किसान आंदोलित रहे हैं। लेकिन अब धरतीपुत्रों की इस पीड़ा को SOLAR ENERGY दूर कर सकेगा। एक पायलट प्रोजेक्ट जो कि JODHPUR DISCOM के साथ प्रदेश के दोनों डिस्कॉम में शुरू किया जा रहा है, उसकी शुरुआत जोधपुर जिले के दो गांवों से होने जा रही है। इन दोनों गांवों के 350 AGRICULTURE CONNECTION को प्रारंभिक तौर पर सौर ऊर्जा के ग्रिड लगातार जोड़ा जा रहा है।
अविनाश केवलिया (AVINASH KEWALIYA)
जोधपुर
किसानों को मिलने वाली बिजली हमेशा से ही मुद्दा रही है। बिजली कम मिलना और इसके समय को लेकर हमेशा से ही किसान आंदोलित रहे हैं। लेकिन अब धरतीपुत्रों की इस पीड़ा को SOLAR ENERGY दूर कर सकेगा। एक पायलट प्रोजेक्ट जो कि JODHPUR DISCOM के साथ प्रदेश के दोनों डिस्कॉम में शुरू किया जा रहा है, उसकी शुरुआत जोधपुर जिले के दो गांवों से होने जा रही है। इन दोनों गांवों के 350 AGRICULTURE CONNECTION को प्रारंभिक तौर पर सौर ऊर्जा के ग्रिड लगातार जोड़ा जा रहा है। पहला चरण सफल हुआ तो इसके बाद डिस्कॉम के प्रत्येक जिले में दो-दो जीएसएस इसके लिए चिह्नित किए जाएंगे। इसके बाद इसका दायरा बढ़ेगा और जमीन उपलब्ध होती है तो एग्रीकल्चर क्षेत्र को मिलने वाली बिजली आधी से ज्यादा सौर ऊर्जा से ही सप्लाई होगी। 2 जीएसएस के 17 फीडर जुड़ेंगे
फिलहाल इस पहल से जोधपुर जिले के 2 जीएसएस क्षेत्र के 17 फीडर जोड़े जाएंगे। यह दो जीएसएस नोसर व डेरा गांव के हैं। इन क्षेत्रों में सोलर प्लांट के लिए जमीन अधिग्रहित कर ली गई है और कंपनियों से बिड आमंत्रित की गई है। यह कार्य प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (पीएम कुसुम) के तहत होना है।
यह होगा बड़ा बदलाव
यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल होता है तो आने वाले समय में अन्य जीएसस भी इसी प्रकार सौर ऊर्जा के पैनल पर शिफ्ट होंगे। ऐसे में एक बड़ी डिमांड जो एग्रीकल्चर बिजली की रहती है वह काफी हद तक परम्परागत ऊर्जा से नवीनीकृत ऊर्जा पर शिफ्ट होगी। इससे ग्रिड बिजली पर लोड कम होगा और किसानों को भी दिन में बिजली उपलब्ध हो सकेगी।
करीब 30 करोड़ का प्रोजेक्ट
- 2 जीएसएस क्षेत्र में लागू होगा पायलट प्रोजेक्ट।
- 450 करीब एग्रीकल्चर कनेक्शन इन क्षेत्रा में।
- 12 मेगावाट लोड के प्लांट लगाने होने दोनों क्षेत्रों में।
- 30 करोड़ करीब लागत हो सकती है प्लांट की।
- 25 साल तक इसका रखरखाव भी करना होगा।
इनका कहना...
पीएम कुसुम योजना में जमीन चिह्नित कर ली गई है। टैंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद एग्रीकल्चर कनेक्शन में सौर ऊर्जा की सप्लाई शुरू करने के लिए प्लांट स्थापित करने के काम शुरू हो जाएंगे।
- पी.एस चौधरी, अधीक्षण अभियंता, जिला वृत्त, जोधपुर डिस्कॉम