jसूरत की मेयर दो दिन रुकी जोधपुर में
जोधपुर. सूरत नगर निगम की मेयर हेमाली बेन बोघवाला ने जोधपुर के पार्षदों को शहर के विकास में अपनी भूमिका निभाने का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि सांसद और विधायक से भी ज्यादा पार्षद की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि उनका जुड़ाव आमजन से सीधा होता है। मेयर बोघवाला ने सूरत के नवाचारों से अवगत कराते हुए जोधपुर के विकास के लिए कई उपयोगी सुझाव भी दिए। उन्होंने नगर निगम जोधपुर के पार्षदों को सूरत आने का न्यौता दिया। सूरत के स्वच्छ भारत मिशन में दूसरे स्थान पर रहने के उपायों को साझा किया तथा गार्बेज-फ्री सिटी बनाने पर प्रकाश डाला।
ऑल इण्डिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ लोकल सेल्फ गवर्नमेंट जोधपुर के निदेशक विनोद पालीवाल ने बताया कि बुधवार को इसमें सूरत नगर निगम महापौर हेमाली बेन बोघवाला एवं उप महापौर (जोधपुर नगर निगम दक्षिण) किशन लाल लड्डा ने कार्यशाला का शुभारभ किया।
जोधपुर अच्छा शहर, सुधार भी जरूरी
मेयर बोघवाला ने जोधपुर को अच्छा शहर बताते हुए कहा कि यहां पर्यटक काफी तादाद में आते हैं। इसी लिहाज से शहर का विकास किया जाना चाहिए। उन्होंने जोधपुर निगम में बोर्ड की बैठक नियमित करने, ड्रेनेज सिस्टम, सड़काें और यातायात में सुधार करने का सुझाव दिया। उन्होंने पार्षदों से यह भी कहा कि वे मिल बैठकर शहर के विकास में अपना योगदान दें। उन्होंने सूरत का हवाला दिया कि अकेले सीवरेज के पानी से सूरत को 400 करोड़ की आय हो रही है। केन्द्रीय आवासन और शहरी मंत्रालय (एमओएचयूए) की ओर से क्षेत्रीय अध्ययन पर्यावरण केंद्र मुंबई एवं ऑल इण्डिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ लोकल सेल्फ गवर्नमेंट मुंबई के क्षेत्रीय कार्यालय, जोधपुर के सहयोग से शहर के एक निजी होटल में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें शहरी विकास से जुड़े विभिन्न अभियानों के क्रियान्वयन में निर्वाचित पार्षदों की भूमिका पर मंथन किया गया। इसमें मेयर समेत सूरत के 33 पार्षदों और जोधपुर के उत्तर-दक्षिण पार्षदों ने हिस्सा लिया।
पहले दिन 75 तो दूसरे दिन 25 पार्षद आए
कार्यशाला के पहले दिन नगर निगम उत्तर-दक्षिण के 75 पार्षदों ने हिस्सा लिया, जबकि बुधवार को महज 25 पार्षदों ने ही रुचि दिखाई।