
Teacher's Day special : Life teacher at every step, just have student
एम आई जाहिर/ जोधपुर.धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो, जिन्दगी क्या है किताबों को हटा कर देखो। मशहूर शाइर निदा फाजली ( Nida Fazli ) का यह शेर हमें हमारी लाइफ में बहुत कुछ सीखने के लिए प्रेरित करता है कि नॉलेज सिर्फ किताबों से नहीं, बल्कि आसपास के माहौल से भी मिलता है। कहते हैं- अ पर्सन हू टीचेज काल्ड टीचर। हर स्कूल में एकेडमिक टीचिंग होती है, मगर टीचिंग सिर्फ स्कूल में ही नहीं होती। यानी टीचर सिर्फ एकेडमिक नॉलेज के ही नहीं होते, बल्कि लाइफ में हर चीज के टीचर होते हैं। जिंदगी की टीचिंग आसपास के माहौल से मिलती है। अगर हममें सीखने की ललक है तो हम किसी से भी कुछ भी सीख सकते हैं। हमारी जिंदगी में हर कदम पर टीचर हैं। इसके लिए हमारा हमेशा स्टूडेंट बना रहना जरूरी है। बस हमें उन्हें देखने की जरूरत है। पेश है टीचर्स डे ( Teacher's Day ) विशेष :
फस्र्ट टीचर मां
एक मां ही है जो बिना कहे शिशु की हर बात समझ लेती है, वह भी तब जब वह बोलना भी नहीं जानता। जब बच्चा रोता है तो मां समझ जाती है कि उसे क्या चाहिए। वह उसे बैठना, खड़ा होना, बोलना, खाना,पीना और वॉकर में चलना और पैरों पर चलना सिखाती है। छोटा बच्चा थोड़ा जिद्दी होता है और वह उत्सुकतावश-जिज्ञासावश हर चीज को जानने और समझने की कोशिश करता है, मां उसे उसके अंदाज में बता कर चुप करवाती है। वह मां ही है, जो उसे बताती है कि बेटा यह दूध है, यह पानी, यह आग है, यह घर है, यह पापा हैं,यह भाई है, वह बहन है। इसी तरह वह जिंदगी के संस्कार का व्यावहारिक पाठ पढ़ाती है।
स्कूल टीचर
प्ले स्कूल या प्राइमरी स्कूल के टीचर के लिए एक नटखट, शरारती, जिद़्दी और बात बात मम्मा-मम्मा कह कर रोने वाले बच्चे को संभालना और खेल-खेल में उसे पढ़ाना बहुत टेढ़ा काम होता है, मगर कई यह टीचर यह काम कर लेते हैं और
बच्चे जो बातें प्राइमरी क्लासेज में सीखते हैं, वे चीजें उनके जिंदगी भर काम आती हैं। बात चाहे एल्फाबेट्स, स्पैलिंग
और प्रननसिएशन की हो या टेबल्स की, या आगे की क्लासेज में मॉरल एजुकेशन हो या मैथ्स के फार्मूले हों या जीके की बात, टीचर्स बच्चे के मन की बात समझ कर उसके लेवल तक जा कर उसे समझाते हैं और आगे की क्लासेज के लिए
उसकी अच्छी फाउंडेशन तैयार करवाते हैं। यह फाउंडेशन मिडिल, सैकण्डरी, ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन तक काम आती है। बाद में बच्चा चाहे एमफिल करे या पीएचडी, प्राइमरी की नींव पर ही जिंदगी की इमारत खड़ी होती है।
ड्राइवर
बच्चे स्कूल आते जाते समय भी अनजाने में बहुत सी चीजें सीख जाते हैं। उनके स्कूल बस ड्राइवर या स्कूल ऑटो ड्राइवर और पर्सनल कार के साथ आने जाने से यह पता चलता है कि सडक़ पर किस साइड में गाड़ी चलाना चाहिए। कौनसी लाइट पर रुकते हैं और कौनसी लाइट पर चलते हैं। वे उनसे जानते हैं कि पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ होता है। बड़े हो कर गाड़ी चलाना सीखने से पहले ड्राइवर के जरिये वे टै्रफिक के कई रूल्स देख और सीख चुके होते हैं। यानी बच्चे का ड्राइवर उसका टै्रफिक टीचर साबित होता है।
सिबलिंग्स
मां के साथ-साथ बड़े भाई बहन ही बच्चे के सबसे पहले दोस्त और लाइफ टीचर होते हैं। बच्चा कई चीजें वह उन्हें देख कर सीखता है। होम वर्क करवाना, टाई बांधना, शूज के लैस बांधना, पेंसिल छीलना, बुक्स और कॉपीज पर कवर चढ़ाना, लेबल लगाना, नेल कटिंग,साइकिल चलाना हो या मोटर साइकिल अथवा स्कूटर चलाना, भाई बहन इसमें मदद करते हैं।
इस तरह वे भी लाइफ टीचर साबित होते हैं।
क्लासमेट्स और फ्रेंड्स
स्कूल में जब एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में पार्टिसिपेट करने की बात होती है तो बच्चे बहुत कन्फ्यूज होते हैं। किस एक्टिविटी में पार्टिसिपेट करें? हॉबीज के अकॉर्डिंग क्या करें, क्या न करें या कौनसा गेम्स चुनें? अथवा सैकण्डरी के बाद कौनसा सब्जेक्ट लेना सही रहेगा? इन सभी कामों में क्लासमेट्स और फ्रेंड्स साथ देते हैं। किसी सब्जेक्ट में काम अधूरा रह जाए तो बुक या कॉपी अवेलेबल करवाना और स्कूल वर्क वक्त पर पूरा करवाने में उनका बड़ा रोल होता है। अगर किसी से झगड़ा होता है तो वे बात संभाल लेते हैं और बुरे समय में काम आते हैं। इसलिए क्लासमेट्स और फ्रेंड्स अच्छे लाइफ टीचर हैं।
स्पिरिचुअल गुरु
मन बैरागी तन अनुरागी कदम-कदम दुश्वारी है,जीवन जीना सहल न जानो बहुत बड़ी फनकारी है। स्कूल और कॉलेज लाइफ के बाद भी बहुत बड़ी जिंदगी पड़ी होती है, जहां लाइफ में हर कदम पर गाइडेंस की जरूरत पड़ती है। हालांकि स्कूल एजुकेशन में बच्चे को मॉरल एजुकेशन तो दी जाती है, लेकिन उसे उसका व्यावहारिक ज्ञान नहीं होता है। धर्म गुरु हमें जिंदगी जीने का हुनर सिखाते हैं। उनके उपदेश और प्रवचन के कारण इन्सान बुरा मार्ग नहीं अपनाता है। इस तरह सही राह दिखाने वाले सारेस्पिरिचुअल गुरु भी हमारे लाइफ टीचर हैं।
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सीखने की कोई उम्र नहीं होती
अंग्रेजी में कहते हैं- हू एवर टीचेज इज टीचर। यानी इसमें सजीव, निर्जीव, पेड़ पौधे, मां बाप, भाई बहन सहित सभी लोग शामिल हैं। जिस व्यक्ति में नये अनुभवों के बारे में खुलापन होगा, वह हमेशा सीखता रहेगा। अपनी पंाचों इंद्रियां खुले रखना ही सीखने की ललक है। वह व्यक्ति कभी कुछ नहीं सीख सकता, जो यह कहता है कि मुझे सब पता है। सीखने की कोई उम्र नहीं होती। हम विनम्र बने रह कर सीखनेे की ललक के साथ बहुत कुछ सीखते हैं।
-प्रसाद गडकरी ( prasad gadkari )
मोटिवेटर और साइक्लोजिस्ट,जोधपुर
Published on:
06 Sept 2019 12:22 am
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