सरकारी मशीन बता रही हमारे रायड़े में तेल कम!

सरकारी मशीन बता रही हमारे रायड़े में तेल कम!

Amit Dave | Publish: Sep, 03 2018 09:20:05 PM (IST) Jodhpur, Rajasthan, India

 

सरकारी व निजी लेब की जांच रिपोर्ट में आ रहा 3 से 4 प्रतिशत का फर्क

किसान बाहर निजी लेब से जांच कराने को मजबूर

जोधपुर।

देश-विदेश की कंपनिया मारवाड़ के सरसों-रायड़े को उच्च गुणवत्ता का मान कर तेल निर्यात करती है। लेकिन दूसरी ओर हमारी सरकारी मशीनें हैं जो हमारे खेतों में उगने वाले सरसो-रायड़े पर सवालिया निशान खड़ा कर रही है। सरकारी मशीन की रिपोर्ट की मानें तो हमारे तिलहन फसलों में 4 प्रतिशत तक कम तेल है। हालांकि जब इन्हीं फसलों की जांच निजी लैब से करवाई जाती है तो मानक एकदम ठीक आते हैं। एेसी ही गड़बड़ी के कारण एक तो हमारी उपज पर सवाल खड़े हो रहे हैं, दूसरा काश्तकार भी ठगे जा रहे हैं। राज्य सरकार ने किसानों व व्यापारियों के हित में जिस मंशा से जीरा मंडी प्रांगण में ऑयल टेस्टिंग लेब स्थापित की थी। उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे है। किसानों व व्यापारियों का सरसों व रायड़ा में तेल व नमी की मात्रा की जांच के लिए सरकारी लेब से मोहभंग हो रहा है। इस वजह से उनको यह जांच बाहर अन्य निजी प्रयोगशालाओं से करवानी पड़ रही है। जिससे उनको प्रति सेम्पल ज्यादा पैसे देने पड़ रहे है और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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मुख्यमंत्री की 60 दिवसीय कार्य योजना में स्थापित

मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे की 60 दिवसीय कार्य योजना में प्रदेश में 10 जगहों पर ऑयल टेस्टिंग लेब स्थापित करने की घोषणा की गई थी। जिसके तहत फरवरी 2014 में यह लेब स्थापित की गई थी। इसकी लागत करीब 10 लाख रुपए आई थी। यहां किसान द्वारा जांच करवाने पर निशुल्क तथा व्यापारी द्वारा जांच करवाने पर प्रति सेम्पल 10 रुपए चार्ज लगते है जबकि यही जांच बाहर से करवाने पर प्रति सेम्पल 100 रुपए लगते है।

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जांच में 4 से 5 प्रतिशत का फर्क

पत्रिका टीम ने किसानों और व्यापारियों की शिकायत पर जीरा मंडी स्थित लेब में रायड़े के सेम्पल की जांच कराई। इसके बाद, उसी सेम्पल की बाहर निजी लेब से जांच कराई। दोनों की जांच रिपोर्ट में रायड़े में तेल की मात्रा व नमी में करीब 2 से 3 प्रतिशत का फर्क आया। व्यापारियों के अनुसार, पूर्व में तो यह फर्क 4 से 5 प्रतिशत तक आता था। हालांकि 2 से 3 या 4 से 5 प्रतिशत का फर्क दिखने में कम लगता हो, लेकिन यही फर्क व्यापार में बहुत असर करता है। व्यापारियों के अनुसार, जिस माल में तेल की मात्रा अच्छी होगी, वही खरीदा जाएगा।

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रायड़ा का 40 प्रतिशत व्यापार लेब से

वर्तमान में रायड़ा का व्यापार 40 प्रतिशत लेब से होता है। किसानों को अपने माल की लेब में जांच करवाने से यह पता चल जाता है कि उनके माल में तेल की मात्रा और नमी कितनी है। इससे किसान को उसकी उपज का पूरा मूल्य मिल जाता है और वह अपने आप को ठगा महसूस नहीं करता है।

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मैने पूर्व में सरकारी लेब में सेम्पल की रिपोर्ट के आधार पर व्यापार किया तो मुझे काफी नुकसान उठाना पड़ा। अब मैने यहां से सेम्पल जांच कराना ही बंद कर दिया। मैं अब यह जांच जयपुर से कराता हूं। भले ही समय व पैसा ज्यादा लगे, पर रिपोर्ट सही आती है। सरकार को सही अत्याधुनिक तकनीक वाली मशीन लगानी चाहिए थी।

सोहनलाल तापडि़या, व्यापारी जीरा मंडी

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मैं अपना माल लाता हूं। यहां सरकारी लेब में जांच कराने पर रायड़े व सरसों में तेल की मात्रा कम आने पर व्यापारी भी माल नहीं लेते है। इससे मुझे नुकसान उठाना पड़ता है।

बाबूराम पोटलिया, किसानतलड़ा की बासनी

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पूर्व में मशीन में खराबी की सूचना मुझे मिली थी। तो हैदराबाद स्थित कंपनी से एक्सपर्ट को बुलाकर मशीन ठीक कराई थी। अब भी इस प्रकार की शिकायत है तो फिर कंपनी को सूचित कर देंगे।

रामसिंह सिसोदिया, सचिव राजमाता विजयराजे सिंधिया कृषि उपज मंडी समिति

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