जोधपुर.
भीलवाड़ा की टेक्सटाइल की प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी ने टर्म लोन व कैश क्रेडिट के नाम पर एक बैंक को 1761.99 लाख रुपए की चपत लगा दी। लोन न चुका पाने पर कम्पनी को एनपीए घोषित किया गया। वहीं, पंजाब नेशनल बैंक के शखा प्रभारी की ओर से सीबीआइ ने कम्पनी के डायरेक्टर, गारंटर व हेराफेरी करने में शामिल दो अन्य फर्मों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
सीबीआइ सूत्रों के अनुसार भीलवाड़ा में भोपालगंज की पंजाब नेशनल बैंक शाखा के मैनेजर पृथ्वीराज मीना की ओर से भेजी शिकायत की जांच के बाद भीलवाड़ा में आरसी व्यास कॉलोनी की टेक्सटाइल फर्म जीपी कॉट्टफेब प्राइवेट लिमिटेड, उसके डायरेक्टर योगेन्द्र पुत्र देवेन्द्र सोनी, सुमन सोनी, जोधपुर में नांदड़ी के रामदेव नगर निवासी निजी गारंटर पुरुषोत्तम पुत्र गिरधारीलाल सोनी, मै.जय श्री कृष्णा टेक्सटाइल्स, मै.सुमित टेक्सपिन प्राइवेट लिमिटेड व अन्य के खिलाफ 1761.99 लाख रुपए की धोखधड़ी करने का मामला दर्ज किया गया।
आरोप है कि कपड़ा बनाने वाली जीपी कॉट्टफेब कम्पनी को देना बैंक से 1192 लाख रुपए का टर्म लोन, 630 लाख रुपए की कैश क्रेडिट लिमिट और 25 लाख रुपए का नॉन फण्ड बेस दिया गया था। कैश क्रेडिट लिमिट बढ़ाकर नौ सौ लाख रुपए कर दी गई थी। कम्पनी की ओर से प्लांट मशीनरी, सम्पत्ति, माल, फैक्ट्री की जमीन व बिल्डिंग आदि गिरवी रखे गए थे। ऋण न चुका पाने पर 30 अक्टूबर 2018 को कम्पनी को एनपीए घोषित किया गया था।
सम्पत्ति से ऋण राशि वसूलने के दौरान योगेन्द्र व सुमन सोनी ने मकान बेचकर 104.49 लाख रुपए का गृह ऋण खाते को जीबी कॉट्टफेब के ऋण खाते में जमा कराया था।
सम्पत्ति कब्जे में ली तो प्लांट-मशीनरी गायब मिले
ऋण न चुका पाने पर मजिस्ट्रेट के आदेश पर बैंक ने कम्पनी की फैक्ट्री, जमीन, बिल्डिंग, प्लांट व मशीनरी कब्जे में ली थी। कम्पनी ने बगैर बैंक की अनुमति के मशीनें गायब कर दी थी। जबकि 31 मार्च 2017 को कागजों में इनकी लागत 1881 लाख रुपए और शेष प्लांट-मशीनरी की 112.50 लाख रुपए लागत दशाई गई थी। 31 मार्च 2020 को 1074.83 लाख रुपए का टर्म लोन और 687.16 लाख रुपए का कैश क्रेडिट लोन बकाया था।
4.15 करोड़ की हेराफेरी
आरोप है कि जीपी कॉट्टफेब से योगेन्द्र सोनी ने जय श्री टेक्सटाइल कम्पनी को 2,85,76000 रुपए और सुमित टेक्सपिन को 1,29,50,000 रुपए चेक से दिए थे। जो बाद में योगेन्द्र सोनी ने निकाल लिए थे।