
Rajasthn high court
-राजनीति चमकाने के लिए उदयपुर के नेता उठाते हैं मुद्दा
-हाईकोर्ट इससे पहले तीन बार खारिज कर चुका है मांग
जोधपुर.
राजनेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए क्या-क्या हथकंडे नहीं अपनाते। जब-जब चुनाव आते हैं तब उदयपुर में राजस्थान हाईकोर्ट की सर्किट बैंच की मांग का मुद्दा उछलता है। माना जा रहा है कि कुछ राजनेता हाईकोर्ट की सर्किट बैंच के बहाने अपनी राजनीति चमकाना चाहते हैं। लेकिन जोधपुर के वकीलों एवं जोधपुर की जनता ने एकजुटता दिखाते हुए इस राजनीति षडय़ंत्र के खिलाफ पूरी ताकत दिखा दिखा दी है। जोधपुर में संचालित राजस्थान हाईकोर्ट के विखण्डन को बचाने के लिए शहर के कई संगठन आगे आ चुके हैं। आंदोलन कर रहे वकीलों ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से भी मुलाकात कर साथ मांगा है। ज्ञात है कि हाईकोर्ट को बचाने के लिए शहर के संगठनों के सहयोग 21 मई से लगातार वकीलों का आंदोलन चल रहा है।
उदयपुर बेंच की मांग पर हाईकोर्ट ने किया हर बार इंकार-
उदयपुर में हाईकोर्ट की सर्किट बेंच की मांग नई नहीं है। वर्ष 1997, 2009 तथा 2013 में यह मांग की गई थी। तीनों ही बार हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी। उदयपुर बेंच की मांग राजनीतिक मुद्दा है। जो केवल चुनाव के दौरान उठाया जाता रहा है। गौरतलब है कि वर्ष 1997, 2009 तथा 2013 चुनावी साल थे और इस वर्ष इस यानि 2018 भी चुनावी साल है।
इतिहास के पन्नों से : हाईकोर्ट एक नजर
राजस्थान राज्य 19 रियासतों के एकीकरण द्वारा गठित किया गया था। वर्ष 1949 में यह निर्णय लिया कि गया कि जयपुर को नए राज्य की राजधानी बनाया जाना चाहिए और उच्च न्यायालय जोधपुर में स्थित होना चाहिए।
29 अगस्त 1949 को राजस्थान के लिए उच्च न्यायालय का उद्घाटन जोधपुर में कर दिया गया था। लेकिन आपातकाल दौरान 8 दिसंबर 1976 को जयपुर में उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ की स्थापना कर दी गई जिसके खिलाफ जोधपुर के वकील आज तक विरोध कर रहे हैं।
वर्ष 1997 में उदयपुर के वकीलों ने उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ की मांग शुरू कर दी।
यह मांग तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश द्वारा 10 फरवरी 1997 को निराधार मानते हुए बंद कर दी गई थी।
इसके बाद वर्ष 2009 में उदयपुर के वकीलों ने फिर यही मांग उठा दी, हाईकोर्ट ने 16 अप्रैल 2009 और 23 जुलाई 2009 के अपने पत्रों के माध्यम से किसी भी खंडपीठ को स्थापित करने से इंकार कर दिया।
वर्ष 2013 में उदयपुर के वकीलों और राजनेताओं के प्रभाव और दबाव के चलते राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय को एक प्रस्ताव का उल्लेख किया लेकिन इसे फिर से खारिज कर दिया गया। इसी वर्ष अप्रैल में भाजपा नेता शांतिलाल चपलोत द्वारा उदयपुर में हाईकोर्ट बेंच की मांग के लिए अनशन करने के फलस्वरुप राज्य सरकार दबाव में आ गई और इसके लिए एक समिति का गठन कर दिया।
भौगोलिक स्थिति उच्च न्यायालय के बेंच के लिए पर्याप्त आधार नहीं
उदयपुर या किसी भी अन्य जगह की भौगोलिक स्थिति उच्च न्यायालय के बेंच के लिए पर्याप्त आधार नहीं हो सकते। हाईकोर्ट एक अपीलीय न्यायालय है जो सिविल या आपराधिक मामलों में मुकदमेबाजी के साक्ष्य या बयान दर्ज नहीं करता है। इसलिए नियमित आधार पर मुकदमे को उच्च न्यायालय में आने की आवश्यकता नहीं है।
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जोधपुर.
जोधपुर हाईकोर्ट को विखण्डन से बचाने के लिए गत 21 मई से लगातार चल रही वकीलों की हड़ताल रविवार को 21 वे दिन दोनों संगठनों के पदाधिकारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की। वकीलों ने गहलोत को उदयपुर में हाईकोर्ट की सर्किट बैंच बनाने के राज्य सरकार के प्रयासों के विरोध में ज्ञापन सौंपा तथा उनसे समर्थन मांगा।
राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के महसचिव धनराज वैष्णव ने बताया कि एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत जोशी तथा लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलदीप माथुर के नेतृत्व में वकीलों के प्रतिनिधिमंडल ने सर्किट हाऊस में गहलोत से एक घंटे तक मुलाकात की। इस दौरान अधिवक्ताओं ने गहलोत को अब तक के आंदोलन के बारे में जानकारी दी।
गहलोत ने अधिवक्ताओं से उदयपुर में सर्किट बैंच बनाने के लिए सरकार की ओर गठित समिति के बारे में कहा कि कोई भी फैसला सभी की सहमति से लेना चाहिए तथा किसी भी फैसले को लागू करने से पहले लोगों की भावनाओं का ख्याल रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधानसभा में इस मुद्दे पर जोधपुर के अधिवक्ताओं का पक्ष रखेंगे। मुलाकात के दौरान उपाध्यक्ष कपिल बोहरा, सहसचिव दिलीप शर्मा, कोषाध्यक्ष पुखराज गोदारा, आंनद पुरोहित, सुरेंद्रसिंह गागुडा़, करणसिंह राजपुरोहित, संदीप शाह,विशाल जांगिड़, त्रिर्थराज सोढा, देवकीनंदन व्यास, जगदीश कड़वासरा मौजूद थे।
Published on:
10 Jun 2018 11:42 pm
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