
बासनी (जोधपुर). इन दिनों में रसोई में गूंदों की सब्जी भले ही गायब हो लेकिन केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) में ऑफ सीजन में भी इसका जायका बढाने के लिए नया इनोवशन किया जा रहा है। इससे अच्छी गुणवत्ता वाले गूंदे खाने को मिलेंगे।
काजरी में क्लाइमेट चेंज के कारण गूंदों के प्लांट में 10 प्रतिशत हिस्से में ऑफ सीजन में ही क्रॉप निकल आई। अक्सर सर्दियों की शुरूआत में इन दिनों घरों में गूंदों की सब्जियों का कोई चलन न होने से इसके व्यावसायिक लक्ष्य पूरे नहीं किए जा सकते हैं। इसलिए सब्जी व्यापारी इसका स्टॉक नहीं रखते हैं लेकिन काजरी में 10 प्रतिशत हिस्से में तैयार ऑफ सीजन के इन गूंदों का उपयोग करने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने इसके बीज निकालकर उसकी बुवाई कर दी ताकि मुख्य सीजन आने तक इसकी रूट स्टॉक (पौधे का जमीन में रहने वाला हिस्सा) तैयार हो जाए। जिस पर अच्छी किस्म के गूंदे के पौधे की बड़ लगाकर ग्राफ्टिंग करने से इसकी फ्रूटिंग निकल आएगी।
ऑफ सीजन के बीजों से एक हजार पौधे करेंगे तैयार
ये अनूठा प्रयोग एक नया इनोवेशन बन कर उभरा है। फिलहाल ऑफ सीजन वाले गूंदों के 2 हजार बीजों की बुवाई की है जो अक्टूबर में ही पक कर तैयार हो गए थे। इसमें 50 प्रतिशत बीजों का जर्मिनेशन (उगना) होने पर एक हजार पौधों की रूट स्टॉक पर अच्छी गुणवत्ता वाले गूंदों की ग्राफ्टिंग की जा सकती है। इन पौधों की फुटिंग आने में 3 साल लगेंगे। इस एग्रो इनोवेशन से किसानों की डिमांड भी समय पर पूरी की जा सकेगी। सब्जी व्यापारी और किसान इस इनोवेशन से जुड़कर अपनी आमदनी बढा सकते हैं।
काजरी में गूंदों की फसल : फैक्ट फाइल
कुल क्षेत्रफल- 1 हैक्टेयर में उत्पादन
पौधों की संख्या- 280 प्लांट
बुवाई का आंकड़ा- 2 हजार बीज
एक किसान के खेत में किया प्रयोग
ऑफ सीजन में तैयार गूंदों की बाजार कीमत तो फिलहाल शून्य है लेकिन काजरी में इनके बीज निकालकर बुवाई की है जिससे तैयार रूट स्टॉक से मुख्य सीजन में गूंदों की गुणवत्ता वाले पौधे तैयार करने में काम आएगी। रोहिचा कलां में एक किसान के खेत में ऐसा ही प्रयोग किया है। - पीआर मेघवाल, कृषि वैज्ञानिक, काजरी।
Published on:
17 Nov 2017 03:50 pm
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