
वैभव के प्रयासों से तीन दिन जोधपुर में रहे अन्तरराष्ट्रीय अंपायर
जोधपुर।
राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) की ओर से तीन दिवसीय राज्य स्तरीय अंपायर स्कोरर सेमिनार का समापन समारोह शुक्रवार को होटल रेडिसन में आयोजित किया गया। यह पहला मौका था कि जब राष्ट्रीय-अन्तराष्ट्रीय मैचों के आयोजन के बिना राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय स्तर के अंपायर तीन दिनों तक जोधपुर में रहे और सेमिनार में प्रदेशभर से आए अंपायर्स-स्कोरर्स को क्रिकेट के नए नियमों व तकनीकों की जानकारी दी। समारोह के मुख्य अतिथि आरसीए अध्यक्ष वैभव गहलोत ने बताया कि नई आरसीए बनने व बदलते क्रिकेट के साथ अंपायर-स्कोरर के लिए इस तरह की सेमिनार की मांग लंबे समय से चल रही थी। अंपायर व स्कोरर सेमिनार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि कई सालों बाद इस तरह की सेमिनार हो पाई है, जोधपुर में यह आयोजन पहली बार हुआ है। गहलोत ने बदलते क्रिकेट के साथ अपडेट रहने के लिए स्कोरर को टैब देने व अंपायर-स्कोरर के टीए-डीए बढ़ाने की घोषणा भी की।
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सेमिनार के महत्व पर डाला प्रकाश
अन्तरराष्ट्रीय स्तर के अंपायर अनिल चौधरी व स्कोरर मनोज भटनागर ने सेमिनार के महत्व पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि जिला कलक्टर इंदरजीत सिंह ने अपने विद्यार्थी जीवन में खेले क्रिकेट जीवन से रूबरू कराया। शहर विधायक मनीषा पंवार ने आरसीए अध्यक्ष वैभव गहलोत के प्रयासों से राजस्थान सरकार की ओर से स्वीकृत किए गए 30 करोड़ की राशि का जिक्र किया, इससे अब यहां बहुत जल्द ही अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैच होंगे। संभागीय आयुक्त डॉ राजेश शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए। समारोह में फैक्लटीज को स्मृत चिन्ह दिया गया। अंत में आरसीए सचिव महेन्द्र शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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स्टेडियम के जीर्णोद्र्धार के लिए हो रही मॉनिटरिंग
आरसीए अध्यक्ष ने बरकतुल्लाह खान स्टेडियम का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने इस स्टेडियम में जीर्णोद्धार के लिए 30 करोड़ की राशि स्वीकृत की है। इसके साथ ही, आरसीए टीम लगातार जेडीए प्रशासन के साथ कार्यो की मॉनिटरिंग भी कर रही है। उन्होंने जयपुर में बनने वाले विश्व के तीसरे सबसे बड़े स्टेडियम के लिए लीज पत्र देने के लिए राज्य सरकार का आभार जताया।
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खेल रत्न का नाम बदलने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया
केंद्र सरकार की ओर से खेल रत्न पुरस्कार के नाम बदलने को गहलोत ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि खेलों में राजनीति नहीं होनी चाहिए। किसी भी पुरस्कार के नाम ऐसे व्यक्तियों के नाम पर रखा जाता है जिन्होंने अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है। ऐसे में नाम बदलने से कोई फ ायदा नहीं होने वाला है और यह काफ ी दुर्भाग्यपूर्ण है।
Published on:
06 Aug 2021 11:59 pm
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