
Very famous and delicious Jodhpuri mawe ki kachori
एम आई जाहिर / जोधपुर.केसरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देस रे...। पर्यटकों का प्रिय ब्लूसिटी जोधपुर अपनी कई विशेषताओं के लिए जाना जाता है। उनमें अदब और इज्जत के साथ आओ सा, पधारो सा, बिराजो सा, जीमो सा और अरोगो सा जैसे शब्द मेहमान का आदर और सत्कार करते हैं। यहां की मीठी बोली ( sweet dishes ) ही नहीं मधुर भाषा के साथ-साथ रहन-सहन और खान पान ( jodhpur food ) भी अहम हैं। जोधपुर की डिशेज ( jodhpuri dishes ) की बात करें यूं तो यहां की कई लजीज चीजें मशहूर हैं, लेकिन उनमें मावे की कचोरी सबसे ज्यादा और विश्वप्रसिद्ध है। आइए आपको बताते हैं मावे की कचौरी ( mawe ki kachori ) बनाने की कहानी ( Mawa Kachori Recipe ) :
डेढ़ सौ साल पहले रावतमल देवड़ा ने बनाई
हम इस वक्त खड़ हैं पावटा स्थित रावत की दुकान पर। यह वह परिवार है जिसने मावे की कचोरी का अविष्कार किया। यहां हमने मावे की कचोरी के इसह अविष्कारक परिवार से जुड़े रजनीश देवड़ा से बात की। उन्होंने बताया कि उनके परदादा रावतमल देवड़ा ने डेढ़ सौ साल पहले मावे की कचोरी का अविष्कार किया था। उनके दो पुत्र हुए, एक मांगीलाल देवड़ा और दूसरे रामचंद्र देवड़ा और रामचंद्र देवड़ा के पुत्र हैं रजनीश देवड़ा और आशीष देवड़ा । रजनीश ने बताया कि अब वे मावे की कचौरी बनाने की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
बड़ी मावे की कचोरी बनाने का तरीका
रजनीश और उनके कारीगर विक्रमसिंह ने बताया कि फीके मावे से मावे की कचोरी बनाते हैं। मैदे में देसी घी का मोयन और पानी एक निश्चित अनुपात मिला कर मावे की बनी गोलियों को भरा जाता है। मावे की गोलियों में जावत्री, जायफल, छोटी इलायची और बड़ी इलायची मिला कर गोलियां तैयार की जाती हैं, इसे कचोरी का भरावन या फिलिंग कहते हैं। इससे कचोरी तैयार होती है। यह कचोरी को देसी घी में तलते हैं। पूरी तरह पक जाने पर कचोरी में से घी निकाल देते हैं और इसे चाशनी में डुबो कर रखा जाता है। लीजिए तैयार हो गई मीठी खुशबू से महकती चाशनी में भीगी मावे की कचौरी। उन्होंने बताया कि एक किलो मैदे से 25 -30 मावे की कचोरी तैयार हो जाती है।
Published on:
23 Jul 2019 04:23 pm
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