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आस्था की अनोखी परिभाषा गढ़ रहे जातरू… कहीं लग रहे ठुमके तो कहीं डीजे की धुन पर थिरक रहे

विधिताओं के देश भारत में लोगों की कई आस्थाएं हैं, जिनके अलग-अलग रूप भी हैं। एेसे ही एक रूप देखने को मिलता है पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े शहर जोधपुर में। यहां हर साल रामदेवरा यात्रा के तहत लाखों जातरू पहुंचते हैं।

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Nidhi Mishra

Aug 29, 2016

Ramdevra Jatroo

Ramdevra Jatroo

विधिताओं के देश भारत में लोगों की कई आस्थाएं हैं, जिनके अलग-अलग रूप भी हैं। एेसे ही एक रूप देखने को मिलता है पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े शहर जोधपुर में। यहां हर साल रामदेवरा यात्रा के तहत लाखों जातरू पहुंचते हैं। बरसों से चली आ रही इस थाती में कई नए आयाम जुड़ते चले गए। वक्त बदला तो आस्था और भक्ति प्रकट करने का तरीका भी बदला।

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वर्तमान समय में जब लगभग सभी आयोजनों में डीजे का इस्तेमाल होने लगा है तो रामदेवरा यात्रा भी इससे अछूती नहीं रही। जोधपुर में आने वाले जातरू लंबी यात्रा को रोचक बनाने के लिए आस्था की अनोखी परिभाषा गढ़ रहे हैं। कहीं ये गाजे-बाजे के साथ ठुमके लगाते यात्रा पर निकलते हैं तो कहीं डीजे की धुन पर थिरकते नजर आते हैं। जोधपुर में अब तक करीब सात लाख जातरू पहुंच चुके हैं।

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हालांकि अभी रामदेवरा मेला आरंभ होने में समय है, लेकिन मसूरिया स्थित लोक देवता बाबा रामदेव के गुरु बालीनाथ मंदिर में करीब 7 लाख जातरू शीश नवा चुके हैं। रक्षा बंधन से प्रतिदिन औसतन 60 से 70 हजार जातरुओं के जोधपुर पहुंचने का क्रम लगातार जारी है।

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देश व प्रदेश के कोने कोने से पहुंच रहे जातरुओं के जत्थे मसूरिया मंदिर में दर्शन के बाद जैसलमेर जिले में स्थित बाबा रामदेव के समाधि स्थल रामदेवरा की ओर बढ़ रहे हैं। मसूरिया बाबा रामदेव मंदिर का संचालन करने वाले पीपा क्षत्रिय समस्त न्याति सभा ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेन्द्र चौहान ने बताया कि मसूरिया बाबा रामदेव मेला 3 सितम्बर को ध्वजारोहण के साथ विधिवत आरंभ होगा।