
funeral of martyr Ganpat Ram
जम्मू के तंगधार में पाकिस्तान की गोलीबारी के दौरान शहीद हुए खुडियाला गांव के जवान गणपत राम का मंगलवार को राजकीय सम्मान के साथ गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान हजारों लोग उमड़े। नम आंखों से ग्रामीणों ने गणपति को विदाई दी।
सुबह करीब 10.00 बजे गणपत की पार्थिव देह दिल्ली से सड़क मार्ग से गांव लाई गई। एक बारगी माहौल गमगीन हो गया। परिवार वाले देह से लिपटकर विलाप करने लगे। इसके बाद घर से स्कूल तक शव यात्रा निकाली गई। गांव की सरकारी स्कूल के पास राजकीय सम्मान के साथ गणपत का अंतिम संस्कार किया गया। शव यात्रा में हजारों लोग उमड़े। भीड़ ने शहीद के जयकारे लगाए। इस दौरान विधायक हनुमान बेनीवाल, भैराराम सियोल, रामनारायण डूडी, लीला मदेरणा सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
पिता किसान, बेटा जवान
शहीद गणपत राम के पिता का नाम पूनाराम है। उसके तीन छोटे भाई है और एक बहन है। बहन ससुराल जाती है। तीनों छोटे भाई पढ़ाई करते हैं। उसके पिता किसान है और वे खेती करते हैं। शहीद गणपत शादीशुदा है और उसका ससुराल बाना का वास चेराई में हैं। जून 2014 में वह सेना में भर्ती हुआ था। 13 अप्रेल 2015 को उसकी शादी हुई थी। गणपत ने बीए प्रथम वर्ष तक पढ़ाई की। शहीद के समाचार के बाद गांव के प्रमुख लोग उसके पिता के पास आए और ढांढ़स बंधाने लगे।
शहीद के पिता के जज्बे को सलाम
देश की सरहद की रक्षा करते हुए शहीद हुए बड़े बेटे गणपतराम का शव घर भी नहीं पहुंचा था और पिता पूनाराम ने कहा, मैं अपने तीनों बेटों को सेना में भेजूंगा। देश की सेवा कौन करेगा। मेरे बेटे, जीएंगे भी देश के लिए और मरेंगे भी देश के लिए.....। रविवार रात को सेना की ओर से आए एक फोन से ओसियां क्षेत्र के खुडिय़ाला में रहने वाले पूनाराम का एक बार तो दिल बैठ सा गया। सेना ने पाकिस्तान से लोहा लेते हुए बेटे की शहादत की सूचना दी। परिवार में किसी को पता नहीं चल जाए, इसलिए सारा दुख अपने दिल में लिए वे पड़ोसी के घर चले गए। पेशे से किसान पूनाराम बेटे को खोने का गम जरूर है, लेकिन देश के लिए शहीद होने का गर्व भी है।
आधी रात को गांव में जैसे-जैसे लोगों को पता चलता गया, सभी लोग पूनाराम के पास एकत्र होने लगे। अपने घर से कुछ कदम दूर जमीन पर लोगों के साथ बैठे पूनाराम की आंखों के सामने बेटे की जिंदगी और उसकी कही बातें घूमती रही। पत्रिका से बातचीत में पूनाराम कुछ ठहर कर बोले, यही सच्चा धर्म है। बेटे को हमेशा कहता था कि देश की सेवा करना पहला धर्म है। अब मैं अपने तीनों बेटे पुखाराम, सीताराम व राजेश को भी सेना में ही भेजूंगा। मैं खुद किसान हूं, पसीने से भारत मां की धरती सीचूंगा और बेटे का खून देश के लिए काम आया और आएगा। पिता की बात सुनकर आस-पास बैठे लोग भी अचरज भरी निगाहों से देखते रह गए।
22 दिन पहले ही गया था
शहीद गणपतराम दो सितम्बर को ही छुट्टियों से वापस ड्यूटी पर गया। पिता व गांव वालों ने बताया कि गणपत जब भी सेना से छुट्टियों पर घर आता तो वह अपने तीनों छोटे भाइयों को सेना की ट्रेनिंग के बारे में बताता और सुबह उनके साथ दौड़ता। दो दिन पूर्व गणपत का फोन आया था, जब उसने कहा कि वह होली पर अब वापस घर आएगा। सभी अपना ख्याल रखना। घर पर निर्माणाधीन मकान के बारे में उसने अधूरा काम पूरा करवाने की बात पिता से कही।
Updated on:
26 Sep 2017, 1:36 PM IST
Published on:
26 Sep 2017, 12:50 PM IST
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