
पिछले 19 वर्षों से जोधपुर की अदालत में चल रहे बहुचर्चित सलमान खान हरिण शिकार मामले में सोमवार को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जोधपुर जिला के न्यायाधीश देवकुमार खत्री की अदालत में बचाव पक्ष ने अंतिम बहस करते हुए सलमान खान को निर्दोष साबित करने की दलीलें दीं। बहस के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार किसी भी मामले में दर्ज एफआईआर की सूचना 24 घंटे के अंदर सम्बन्धित न्यायालय में देना अनिवार्य है। जबकि इस हाई प्रोफाइल मामले में एफआईआर आश्चर्यजनक रूप से 6 दिन बाद कोर्ट में भेजी गई।
उन्होंने बहस बढ़ाते हुए कहा कि यदि 2 अक्टूबर 1998 को एफआईआर दर्ज की गई तो 4 अक्टूबर को फिल्म हम साथ साथ हैं की यूनिट को पब्लिक पार्क (उम्मेद उद्यान ) स्थित मोर के पिंजरों के पास शूटिंग की अनुमति कैसे दे दी गई, जिसमें सलमान खान व अन्य फिल्मी कलाकार शामिल थे। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि 6 अक्टूबर 1998 के बाद वन विभाग की ओर से किए गए विभिन्न पत्र व्यवहार में इस मामले में दर्ज की गई प्रथम सूचना रिपोर्ट के नम्बर अंकित नहीं किए गए थे। इससे यही प्रतीत होता है कि एफआईआर 2 अक्टूबर 1998 को नहीं लिखी गई थी।
फर्द लिखने वाले ने दिखाई दो स्थानों पर उपस्थिति
बचाव पक्ष के अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत ने काले हिरण शिकार के इस मामले में कई महत्वपूर्ण फर्द लिखने वाले वन्यजीव कर्मचारी कैलाश गिरी को उसकी ओर से दिए गए बयान और उससे की गई जिरह के आधार पर झूठा करार दिया। गिरी ने अपने बयानों में कहा था कि 2 से 6 अक्टूबर 1998 को वह जोधपुर स्थित वन विभाग के आफिस में ड्यूटी दे रहा था। जबकि सलमान के अधिवक्ता ने जिरह के दौरान उसकी उपस्थिति का रिकार्ड न्यायालय में पेश कर यह साबित कर दिया था कि वह 2 से 5 अक्टूबर 1998 को जोधपुर मुख्यालय से 75 किलोमीटर दूर वन विभाग की साथिन चौकी पर तैनात था। वहीं 6 तारीख को उसने हाजिरी रजिस्टर में टूर पर जाना दिखा रखा था। दोपहर बाद शुरू हूई अंतिम बहस डेढ़ घंटे तक चली। समय अभाव के कारण सोमवार को बहस पूरी नहीं हो पाई। इस मामले में अगली सुनवाई 6 नवम्बर को होगी।
Published on:
31 Oct 2017 10:29 am
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