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सलमान खान हरिण शिकार मामले की अंतिम बहस में आया नया मोड़, बचाव पक्ष ने किया ये दावा

बचाव पक्ष का दावा: लोकल समाचार पत्र में घटना छपने के बाद लिखी छद्म FIR  

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अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जोधपुर जिला के न्यायाधीश देवकुमार खत्री की अदालत में चल रहे बहुचर्चित कांकाणी हिरण शिकार के मामले में फिल्म अभिनेता सलमान खान के अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत ने शनिवार को अंतिम बहस के दौरान दावा किया है कि सलमान और अन्य के खिलाफ लिखी गई प्रथम सूचना रिपोर्ट पूर्णत: झूठी तथा मनगढंत है। उन्होंने वन विभाग द्वारा जारी किए गए 6 अक्टूबर 1998 के उस गोपनीय पत्र पर ध्यान आकर्षित किया, जिसमें विभाग ने एक स्थानीय समाचार पत्र से घटना के बारे में जानकारी देने तथा शिकारियों के बारे में बताने का जिक्र है। जबकि एफआईआर 2 अक्टूबर 1998 को दर्ज बताई गई है। इसी सबूत के आधार पर बचाव पक्ष ने इस एफआईआर को झूठा तथा मनगढंत बताया है। आपको बता दें कि मामले में सुबह 11 बजे से लगातार दो घंटे तक अंतिम बहस जारी रही।

बचाव पक्ष ने कहा शिकार के सम्बन्ध में जोधपुर के एक स्थानीय अखबार में 'सलमान और सैफ ने दो हिरणों का शिकार किया ?' शीर्षक से खबर छपने के बाद वन विभाग ने पिछली तारीख में मुकदमा दर्ज किया। बचाव पक्ष ने कहा कि इससे साबित होता है कि एफआईआर झूठी तथा मनगढंत है। वन विभाग द्वारा 'हम साथ साथ है' फिल्म की निर्माता कम्पनी राजश्री से पत्र के माध्यम से यह पूछने पर भी संदेह जताता है कि शूटिंग के दौरान कौन कौन सदस्य थे, गाडिय़ां कौनसी काम ली थी आदि।

वन्य विभाग द्वारा परिवहन अधिकारी को लिखे पत्र में एफआईआर नम्बर तथा दिनांक नहीं लिखी होने से भी अभियोजन की कहानी पर संशय उत्पन्न होता है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता सारस्वत ने चश्मदीद गवाह के बारे में बहस करते हुए कहा कि गवाह पूनमचंद, छोगालाल आदि घटनास्थल से दो से तीन किलोमीटर दूरी पर रहते हैं जबकि घटना प्रह्लाद राम की ढाणी तथा ओमाराम भील की ढाणी के आस पास की बताई गई। किसी भी नजदीकी चश्मदीद गवाह के बयान नहीं करवाना भी अभियोजन पर संदेह उत्पन्न करता है। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि अभियोजन के गवाहों के प्रथम सूचना रिपोर्ट पर विरोधाभासी बयानों से तीन अलग अलग एफआईआर का भ्रम उत्पन्न होता है। आज समय आभाव के कारण अंतिम बहस पूरी नहीं हो पाई। सोमवार को बचाव पक्ष की ओर से बहस फिर से शुरू की जाएगी। सुबह 11 बजे से लगातार दो घंटे तक चली अंतिम बहस के दौरान मामले के सह आरोपी सैफ अली खान , नीलम तथा सोनाली के अधिवक्ता केके व्यास तथा सरकार की ओर से अभियोजन अधिकारी भवानीसिंह भाटी और विश्नोई समाज के महिपाल सिंह उपस्थित थे।

23 अक्टूबर को हुई थी अभियोजन पक्ष की अंतिम बहस

बहुचर्चित कांकाणी हिरण शिकार के मामले में सीजेएम ग्रामीण कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की ओर से लगातार 17 सुनवाई के बाद आखिरकार २३ अक्टूबर को अंतिम बहस पूरी हो गई। अब बॉलीवुड स्टार सलमान खान की ओर से बचाव पक्ष के रूप में आज 28 अक्टूबर से अंतिम बहस शुरू हुई।



पीठासीन अधिकारी देवकुमार खत्री की अदालत में सोमवार को अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक भवानीसिंह भाटी ने अपनी अंतिम बहस पूरी करते हुए कहा कि पूनमचंद, छोगाराम, मांगीलाल व शेराराम सभी घटना की ताईद कर रहे हैं। इसीलिए आरोपी सलमान को सख्त सजा दी जाए। अन्य आरोपी सैफ अली खान , नीलम, तब्बू व सोनाली बेन्द्रे ने सलमान को शिकार के लिए उकसाया व शिकार में सहयोग किया इसलिए उन्हें भी सजा दी जानी आवश्यक है। आरोपियों के खिलाफ अपराध साबित होता है इसीलिए संदेह का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान सलमान की ओर से अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत, नीलम, सोनाली बेंद्रे व सैफ अली खान की ओर से केके व्यास व तब्बू की ओर से मनीष सिसोदिया विश्नोई समाज की ओर से महिपाल विश्नोई मौजूद रहे। मामले में अब 28 अक्टूबर से बचाव पक्ष की ओर से अंतिम बहस शुरू की जाएगी।

ये है मामला


आज से 19 वर्ष पहले फिल्म की शूटिंग के दौरान फिल्म स्टार सलमान खान , सैफ अली खान , तब्बू, व सोनाली बेंद्रे सहित अन्य के खिलाफ पहले मीडिया में प्रकाशित समाचारों के अनुसार शूटिंग स्थल के आस-पास हिरणों का शिकार करने के आरोप लगे। इन पर प्रसंज्ञान लेते हुए वन विभाग के माध्यम से स्थानीय पुलिस ने सलमान व अन्य के खिलाफ आदलातों में चार मुकदमे दायर किए। दो मुकदमों में निचली अदालतों से सजा होने के बाद हाईकोर्ट में दायर अपील में सलमान बरी हो गया, वहीं तीसरे अवैध हथियार रखने के मामले में निचली अदालत ने ही उसको बरी कर दिया। वैसे हाईकोर्ट के फैसलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की गई है तथा हथियार मामले में सेशन कोर्ट में अपील दायर हुई है। अभियोजक अधिकारी भवानी सिंह ने बहस शुरू करते हुए कोर्ट को घटनास्थल का पूरा वर्णन किया, इसके साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बारे में भी कोर्ट को विस्तृत वर्णन कर बताया।