24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

महात्मा गांधी जब जोधपुर पहुंचे, जानिए कैसे?

जिन्दगी में तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कभी जोधपुर नहीं आ सके, लेकिन बापू जैसा दिखने वाला फ्रांस का एक नागरिक बापू का वेश धारण कर जोधपुर पहुंच गया। यह व्यक्ति पहले बेंगलूूरु और फिर अहमदाबाद पहुंचा। अहमदाबाद में साबरमती आश्रम पहुंचा और वहां गांधीवादी साथियों ने उन्हें बापू का वेश धारण करवाया।

2 min read
Google source verification

image

Harshwardhan Singh Bhati

Feb 27, 2017

gandhi get up

gandhi get up

वैष्णव जन तो तेने कहिए, पीड़ पराई जाणे रे...अल्लाह तेरो नाम ईश्वर तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवान...। अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी का जादुई व्यक्तित्व और उनकी विचारधारा से देसी विदेशी सभी प्रभावित हैं।

फ्रांस के टोलोस शहर के जॉनी बापू के हमशक्ल हैं। वे भारत आए और बेंगलूरु व अहमदाबाद पहुंचे। अहमदाबाद में वे साबरमती आश्रम पहुंचे। वहां उन्हें बापू का वेश धारण करवाया गया। वे इसी रूप में जोधपुर के गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र स्थित गांधी भवन पहुंचे। जैसे ही वे गांधी भवन पहुंचे, लोगों में चर्चा का केंद्र बन गए। कौतूहलवश लोग उन्हें देखने, उनसे मिलने, उनसे हाथ मिलाने, स्पर्श करने और उनके साथ फोटो व वीडियो बनाने लगे। मानो बापू साक्षात जोधपुर आ गए हों। गांधी भवन में डॉ. भावेंद्र शरद जैन ने उनका स्वागत कर उन्हें गांधी साहित्य भेंट किया और केंद्र की गतिविधियों के बारे में बताया। जॉनी ने बताया कि जोधपुर के बाद वे इसी रूप में पुष्कर जाएंगे।

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के समय पूरा देश बापू की एक आवाज पर इक हो जाता था। उनका आह्वान जादू जैसा काम करता था। एेसा उल्लेख मिलता है कि वे लूणी तक आए थे। बापू को जोधपुर तक नहीं आने दिया गया था। लूणी स्टेशन पर जोधपुर के संगीत निर्देशक बृजलाल वर्मा बापू से मिले थे। जोधपुर के लोगों की बापू से मिलने की वह तमन्ना तब पूरी नहीं हुई, मगर एक व्यक्ति को बापू के वेश में देखा तो महात्मगा गांधी के विचारों से प्रभावित लोग जॉनी को ही बापू जैसा ही समझ उनसे मिल कर खुश हो उठे।

उल्लेखनीय है कि महात्मा गांधी सन 1943 में ट्रेन से जोधपुर के लिए रवाना भी हुए थे, लेकिन अंग्रेजों के प्रभाव के कारण उन्हें जोधपुर तक नहीं आने दिया गया। अंग्रेजों के दबाव में रियासत की व्यक्तिगत ट्रेन के कारण लूणी तक ही आ सके थे।

इधर बृजलाल वर्मा के पुत्र गोपालकृष्ण वर्मा ने बताया कि उनके पिता बृजलाल वर्मा ने अपने साथियों के साथ लूणी स्टेशन पहुंच कर महात्मा गांधी का माल्यार्पण कर स्वागत किया था। तब उन्हें बताया था कि समाज के साथ इस हद छुआछूत हो रही है कि सफाई कर्मचारी भी सफाई करने के लिए नहीं आते। बापू ने अस्पृश्यता निवारण करवाने के लिए कहा था।

ये भी पढ़ें

image