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video : निलंबित डीएसओ व आईएएस अधिकारी निर्मला मीणा की गिरफ्तारी पर रोक

राजस्थान हाईकोर्ट ने मीणा को एसीबी कार्यालय में 22 को उपस्थित होने व एसीबी को 26 तक अनुसंधान की रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।  

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राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश गोपालकृष्ण व्यास ने निलंबित डीएसओ और आईएएस अधिकारी निर्मला मीणा की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाते हुए उन्हें 22 फरवरी तक सप्लाई विभाग में हुए कथित घोटाले की जांच में सहयोग करने व एसीबी को २६ फरवरी तक मीणा से पूछताछ की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है।

अतिरिक्त चार्ज के रूप में जिम्मेदारी दी थी

न्यायाधीश व्यास ने याचिकाकर्ता निर्मला मीणा की ओर से सीआरपीसी की धारा ४३८ के तहत अग्रिम जमानत के लिए दायर आवेदन की सुनवाई पर यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेंद्रसिंह सिंघवी, अखिलेश राजपुरोहित व करणसिंह राजपुरोहित ने कहा कि याचिकाकर्ता को पूर्व डीएसओ महावीरसिंह के एपीओ करने पर अतिरिक्त चार्ज के रूप में जिम्मेदारी दी गई थी। जबकि एसीबी ने उस अधिकारी के ट्रांसफर का जिक्र करते हुए क्लीन चिट दे दी।

गेहूं लैप्स हो गया

वहीं महावीरसिंह ने चार महीने तक गेहूं का वितरण ही नहीं किया, जिससे जो गेहूं लैप्स हो गया, वही वापस आवंटित करवाया। उन्होंने बताया कि ३५,०२० क्विंटल गेहूं में से १५,८०० क्विंटल गेहूं वितरित हुआ। उन्होंने इसका रिकॉर्ड पेश करते हुए कहा कि मीणा का इसमें कहीं भी-कुछ भी लेना देना नहीं है। वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से एएजी राजेश पंवार, उत्कर्षसिंह व आयुष गहलोत ने मीणा की अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि उनके पास मीणा के खिलाफ प्राइमा फेसी गवाही मौजूद है। एसीबी ने कई गवाहों से सीआरपीसी की धारा १६४ के तहत बयान लिए हैं, जो मीणा के खिलाफ हैं। दोनों पक्षों के बयान सुनने के बाद न्यायाधीश व्यास ने याचिकाकर्ता मीणा से २२ फरवरी को आईओ के समक्ष उपस्थित होकर बयान देने व अनुसंधान में सहयोग करने के लिए कहा।

जोधपुर नगर निगम को नोटिस, जवाब तलब
जोधपुर की एक अदालत ने चांदपोल बकरामण्डी रोड स्थित तकिया आलमशाह की पट्टा शुदा निजी जायदाद के विवाद पर नगर निगम को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस सिलसिले में अपर न्यायाधीश संख्या चार जोधपुर में न्यायालय के आदेश की अवमानना की कार्रवाई के लिए अवमानना याचिका प्रस्तुत की गई थी।

यह है मामला
अधिवक्ता जितेंद्र चौपड़ा ने बताया कि जोधपुर की न्यू चांदपोल रोड बकरामण्डी चौक जोधपुर में सलीमशाह वगैरह के पूर्वजों की एक जायदाद है, जो तकिया आलमशाह गंगलाव नाम से प्रसिद्ध है। नगर निगम ने इस जायदाद के मालिकों की सहमति से वर्ष 2008 में सामुदायिक भवन का निर्माण कार्य शुरू किया, लेकिन इस भवन पर तयशुदा नाम नहीं लिखवा कर अलग नाम लिखवाने पर विवाद हुआ और मामला न्यायालय पहुंचा। तब न्यायालय ने मामले के सम्बंधित पक्षों को सुन कर स्थगन आदेश पारित किया। चौपड़ा ने बताया कि न्यायालय की ओर से पारित स्थगन आदेश के बावजूद क़ुरैशी समाज के सदर निसार अहमद ने वादग्रस्त सामुदायिक भवन किराये पर दे दिया । उनके पास इस जायदाद का क़ब्ज़ा होने से किराये की मोटी रकम आम जन से वसूल की जा रही है, लेकिन निगम में जमा नहीं कराई जा रही है।

स्टे के बावजूद चल रही स्कूल
इस सामुदायिक भवन की पहली मंजिलि पर कोर्ट से स्टे के बावजूद पिछले एक वर्ष से निजी स्कूल चल रही है, जिनमें कऱीब सौ-डेढ़ सौ बच्चे पढ़ रहे हैं। उनसे भी मोटी फ़ीस वसूल कर सदर निसार अहमद निगम में जमा नहीं करवा रहे हैं। जबकि निगम ने इस पूरे प्रकरण पर चुप्पी साधते हुए यह कृत्य नहीं रोकने पर अवमानना याचिका प्रस्तुत की।

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