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राजस्थानी शब्दकोष डिजिटलाइजेशन परियोजना का वर्चुअल लोकार्पण

सीताराम लाळस का शब्दकोष भाषाई सौंदर्य का अनुपम उदाहरण : शेखावत

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राजस्थानी शब्दकोष डिजिटलाइजेशन परियोजना का वर्चुअल लोकार्पण

राजस्थानी शब्दकोष डिजिटलाइजेशन परियोजना का वर्चुअल लोकार्पण

जोधपुर. पद्मश्री से सम्मानित और राजस्थानी भाषा के विद्वान् डॉ. सीताराम लालस की जयन्ती के अवसर पर उनकी ओर से संपादित और लिखित 11 खण्डों में समायोजित 7706 पृष्ठों में अंकित राजस्थानी शब्दकोष के डिजिटल संस्करण
का वर्चुअल लोकार्पण बुधवार को पूर्व सांसद गजसिंह ने किया। उसी के साथ इसका सर्च इंजन और मोबाइल ऐप भी लांच की गई । वर्चुअल कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने शब्दकोश की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि इससे राजस्थानी के शोधार्थियों और जिज्ञासुओं को बहुत फायदा होगा । इतिहासकार प्रो. जहूर खां मेहर, पूर्व सांसद ओंकार सिंह लखावत एवं शिकागो यूनिवर्सिटी से प्रोफेसर जेम्स ने भी अपने विचार व्यक्त किए । विमोचन कार्यक्रम पूर्व सांसद गजसिंह के हाथों संपन्न हुआ । तकनीकी विशेषज्ञ मनोज मिश्रण ने सर्च इंजन का उपयोग करने और इस शब्दकोश की यात्रा की सफलता के बारे में जानकारी प्रदान की। यह कार्य लक्ष्मण सिंह राठौड़ पूर्व महानिदेशक मौसम विज्ञान विभाग की अध्यक्षता में बनी समिति के तहत किया गया जिसमें चौपासनी शिक्षा समिति, महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश, श्री संस्थान, चारण डॉट ऑर्गेनाइजेशन, किताब क्लब एवं अन्य सहयोगी रहे।

शब्द कोष में दो लाख राजस्थानी शब्द व उनके अर्थ
राजस्थानी शब्दकोश डिजिटाईजेशन परियोजना का उद्देश्य, पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित एवं चौपासनी शिक्षा समिति, जोधपुर की ओर से वर्ष 1962 में प्रकाशित एवं वर्ष 2013 में पुन: प्रकाशित शब्द कोष को डिजिटलाइज करके इसे वेब एवं मोबाइल एप के माध्यम पर उपलब्ध करना है। शब्द कोश में करीब दो लाख राजस्थानी शब्द उनके अर्थ, व्युत्पत्ति, समनाम, मुहावरे, प्रयोग इत्यादि के साथ सम्मिलित है। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद लक्ष्य प्राप्त परियोजना पूर्व सांसद गजसिंह के संरक्षण में वर्ष 2020 में प्रारम्भ की गई थी। परियोजना के तकनीकी सलाहकार मनोज मिश्रण के अथक प्रयास से कोरोना के संक्रमण काल की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद यह परियोजना अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल हो गई है।

राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने भेजा संदेश
अति प्रसन्नता और गर्व का विषय है कि गौरवशाली राजस्थान और असंख्य राजस्थानी प्रेमी लोगों के सुदीर्घ सांस्कृतिक इतिहास का प्रतीक राजस्थानी शब्दकोश डिजिटल रूप में उपलब्ध होने जा रहा है । यह मायड़ भाषा के समृद्ध विपुल समाज के लिए ही नहीं , विश्व के भाषा प्रेमियों के लिए आल्हादकारी घटना है । इस महती कार्य से जुड़े सभी महानुभावों को मेरी बधाई । डॉ . सीताराम जी लालस के इस सृजन यज्ञ में कई मनीषियों का योगदान और दशकों की अनथक तपस्या समाहित है । चौपासनी शिक्षा समिति और मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के संरक्षक गजसिंह सहित सामाजिक सरोकार से जुड़ी अनेकानेक विभूतियों का अविस्मरणीय योगदान इस कोश के रूप में फलीभूत हुआ है । देवभाषा संस्कृत से नि:सृत डिंगल पिंगल की सदियों पुरानी यात्रा में उद्भूत राजस्थानी शब्दों का व्यापक भण्डार है । मरुधरा की संस्कृति का जीवन्त दस्तावेज है । यह जानकारी लोमहर्षक है कि जैसे वैदिक शब्दों के अर्थ उन शब्दों में ही निहित हैं, राजस्थानी शब्द भी अपना संस्कार उपस्थित करता है । एक ही पदार्थ स्थिति के कई पर्यायवाची शब्द इस भाषा के सौष्ठव को रेखांकित करते हैं । प्रत्येक पर्याय अपना विशिष्ट अर्थ उस संस्कार सहित उपस्थित करता काल और स्थिति से साक्षात कराता है । डॉ . लालस और अनेक महानुभावों ने ऐसे अनगिन शब्दों को लिपिबद्ध किया जो मरुधर मानस में श्रुति परम्परा को समृद्ध बनाए हुए थे । इस दृष्टि से उन कई शब्दों के विलुप्त होने की आशंका भी निर्मूल हुई है । ढाई लाख शब्दों की यह निधि निश्चित ही प्राचीनतम इण्डो - आर्यन भाषाओं के परिवार में अपना अप्रतिम स्थान स्थापित करेगी । अरबी , जापानी , रूसी आदि विश्वभाषाओं में राजस्थानी शब्दों का मूल अथवा अपभ्रंश रूप में समावेश भी भाषा की प्राचीन विरासत को इंगित करता है । अब समूचे कोश का डिजिटल संस्करण उपलब्ध होने पर विश्व भाषा परिवार में राजस्थानी की उपस्थिति का प्रत्यक्ष होगा । इस कालजयी उपलब्धि के लिए आप सबके साथ मैं भी अभिभूत हूं ।

विचार गोष्ठी
राजस्थानी शब्द कोश के रचयिता पद्मश्री सीतारामजी लाळस की जन्म व पुण्यतिथि के अवसर पर राजस्थानी मासिक ‘माणक’ व वागर्थ संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने लाळस को युग पुरुष बताया। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए जेएनवीयू राजस्थानी विभाग के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. कल्याण सिंह शेखावत ने कहा कि लाळस जी का शब्दकोश विज्ञान सम्मत व भाषाई सौंदर्य का अनुपम उदाहरण है । कार्यक्रम में ‘माणक’ के संपादक पदम मेहता ने कहा कि दस करोड़ राजस्थानी लोगों की मातृभाषा राजस्थानी को मौजूदा दौर में नई पीढी तक पहुंचाने के लिए प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में देने की महत्ती आवश्यकता है। मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार सत्यदेव संवितेन्द्र ने कहा कि भाषा और व्याकरण के साथ राजस्थानी की तमाम खूबियों को विराट पाठक वर्ग तक पहुंचा कर ही हम मातृभाषा के आंगन को सुशोभित कर सकते हैं। संगोष्ठी में आशीष मेहता, खेमकरण लाळस, कीर्ति परिहार, लक्ष्मीकांत पुरोहित, किशनसिंह सोलंकी, गौतम सुराणा, गुड्डू खान सहित उपस्थित सभी ने लाळस जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।


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