एम आई जाहिर / जोधपुर. ( jodhpur news. current news ) .व्यावसायिक रंगमंच या एमेच्योर थिएटर तभी फलफूल सकता है जब समाज खुद आगे आ कर एेसे रंगकर्म में सहयोग करे। प्रख्यात रंगकर्मी ( Actor ) व रंग निर्देशक सौरभ श्रीवास्तव ( Saurabh Srivastava ) ने एक मुलाकात ( interview ) में यह बात कही। वे जोधपुर थिएटर एसोसिएशन ( Jodhpur Theater Association ) की ओर से आयोजित जोधपुर थिएटर फेस्टिवल ( Jodhpur Theater Festival ) के दौरान नाटक के मंचन के सिलसिले में जोधपुर आए हुए हैं। ध्यान रहे कि वे रंगकर्मी व रंग निर्देशक के साथ एक संजीदा कलाकार और अनुवादक हैं। वे अपनी नई -नई व कलात्मक गतिविधियों से सभी को चौंकाते रहते हैं। श्रीवास्तव भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ( ACB ) जयपुर में अतिरिक्त महानिदेशक भी हैं।
उन्होंने कहा कि रंगकर्मियों का अपने स्तर पर रंग संस्था का गठन और रंग उत्सव का आयोजन करना बहुत ही खुशी की बात है। मैं अपनी गंधर्व संस्था के सदस्यों को भी जोधपुर में रंगकर्म करने के लिए प्रेरित करूंगा। श्रीवास्तव ने कहा कि मुझे इस बात की खुशी है कि मैं सन 1992 से 1995 तक जिस जोधपुर में रहा, उस जोधपुर के मेरे साथी कलाकारों ने अपने स्तर पर रंगकर्म उत्सव मनाने का फैसला किया है। उल्लेखनीय है कि सौरभ श्रीवास्तव उन रंगकर्मियों में से हैं, जो अंग्रेजी साहित्य व नाटकों का अध्ययन व अनुवाद कर उसे भारतीय समाज, पाठक व रंग दर्शक तक पहुंचाने में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने ऑस्कर वाइल्ड की रचना इम्पॉर्टेन्स ऑफ बीइंग अर्नेस्ट का ‘मायने गंभीर होने के’ नाम से हिन्दी में अनुवाद किया था। वहीं क्रोएशिया के लेखक मीरो गागरान की रचनाआें द डॉल और ‘डेथ ऑफ एन एक्टर; का भी हिन्दी अनुवाद किया है। जबकि नावेल कावर्ड के ब्लाइ स्पिरिट का बेचारी अमृता नाम से अनुवाद किया, यह एक अच्छा हास्य नाटक साबित हुआ। वे जोधपुर में रहने के दौरान भी रंगकर्म के क्षेत्र में सतत सक्रिय रहते थे।