समूचे मारवाड़ सहित बीकानेर संभाग में हालांकि संकटग्रस्त प्राणी की संख्या वर्तमान में मात्र 256 ही है। वन्यजीव सैन्सस के अनुसार विगत पांच वर्षों से इनकी संख्या लगातार बढ़ी है।
मारवाड़ के जालोर क्षेत्र से 'बिज्जूÓ के 2 बच्चों को रैस्क्यू कर जोधपुर के वन्यजीव चिकित्सालय भेजा गया जहां वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. श्रवणसिंह राठौड़ की देखरेख में इन बच्चों को बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
कार्निवोरा समूह के विवरिडी परिवार के मांसाहारी वन्यजीव बिज्जू रात्रिचर प्राणी हैं, जो बिलों, चट्टानों के पीछे अथवा झाडि़यों के नीचे घर बना कर रहते हैं। जोधपुर जिले में करीब 45 वर्ष पूर्व 1972 में बिज्जू को देखा गया था।
मारवाड़ के जोधपुर, नागौर, जैसलमेर, बाड़मेर, पाली, जालोर व सिरोही में अभी तक केवल सिरोही जिले के माउंट की वादियों में ही रिपोर्टेड है।
वन विभाग के सैन्सस में बिज्जू
वर्ष --जोधपुर संभाग के माउंट आबू में
2011--119
2012--164
2013--177
2014--186
2015--256
फैक्ट फाइल
वैज्ञानिक नाम : विवेरिकुला इंडिका
पहचान : शरीर पर काली धारियां व पूंछ पर काली रिंग
खुराक : चूहे, सांप, मृत मवेशी
जीवनकाल : 8 से 9 वर्ष
कहां पर ज्यादा : 300 एमएम वर्षा से कम वाले क्षेत्र में नहीं मिलता
राजस्थान में कुल संख्या : करीब 1500
थार में दुर्लभ
थार रेगिस्तान में बिज्जू अत्यंत दुर्लभ प्राणी है जिसका अरावली क्षेत्र के जालोर में मिलना शोध का विषय हो सकता है। वर्ष 1972 में जोधपुर जिले के बिलाड़ा में प्रो. ईश्वरप्रकाश ने 'बिज्जू रिपोर्ट किया था। मारवाड़ के जालोर में बिज्जू के बच्चों का दुबारा दिखाई देने से इनके संरक्षण की संभावनाएं बढ़ी हैं।
डॉ. सुमित डूकिया
वन्य जीव विशेषज्ञ व सदस्य
इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर
जोधपुर