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चांद के कारण यूं रात को थार के टीले बदलेंगे अपनी जगह, कारण जान हैरान रह जाएंगे आप

भूकम्प के लिहाज से संवेदनशील हिस्से यानी फॉल्ट में भूकम्प आ सकता है।

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जोधपुर . एक जनवरी की रात और दो जनवरी की सुबह के बीच बाड़मेर और जैसलमेर की सीमा से लगते बालू के टीले अपना स्थान बदल सकते हैं। सुपरमून के कारण चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति से तेज हवा चलने की संभावना है। इससे बालू उड़कर एक से दूसरे स्थान पर चली जाएगी। सुपरमून के कारण धरती की प्लेटों के बीच भी खिंचाव पैदा होता है। एेसे में भूकम्प के लिहाज से संवेदनशील हिस्से यानी फॉल्ट में भूकम्प आ सकता है। सुपरमून की घटना सोमवार देर रात होगी। इसमें चंद्रमा पृथ्वी की कक्षा से सर्वाधिक नजदीक यानी ३ लाख ५८ हजार ९९४ किलोमीटर पर आएगा, जो पृथ्वी व चंद्रमा की औसत दूरी ३८४००० किलोमीटर से बहुत नजदीक है। इससे चंद्रमा १४ फीसदी अधिक बड़ा और ३० फीसदी अधिक चमकीला नजर आएगा। चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों पर तेज हवाएं चलेंगी। सर्वाधिक असर महासागरों और समुद्र में होगा। मरुस्थलीय हिस्सों में भी हवा से बालू उड़ेगी। एेसे में सीमा पर तैनात जवानों को भी अधिक मुस्तैदी रखने की जरूरत है।

इस महीने ब्लूमून की घटना भी

चंद्रमा, पृथ्वी का उपग्रह है। यह पृथ्वी के चारों और दीर्घ वृत्ताकार यानी अण्डाकार कक्षा में चक्कर काटता है। सुपरमून की घटना के समय चंद्रमा और पृथ्वी की दूरी ३६०००० किलोमीटर से कम रह जाती है। माइक्रोमून घटना के समय इन दोनों के बीच ४०५००० किमी की दूरी रहती है। दोनों के बीच औसत दूरी ३८४००० किलोमीटर रहती है। इस महीने एक जनवरी और ३१ जनवरी दोनों ही दिन सुपरमून की घटना होगी। एक ही महीने में दो सुपरमून की घटनाओं के कारण ३१ जनवरी के चंद्रमा को ब्लूमून कहा जाएगा। इसकी प्रायिकता २.७ वर्ष में एक बार होती है। ब्लूमून की घटना ३१ मार्च को भी होगी। एक ही वर्ष में ब्लूमून की दो घटनाएं बहुत कम होती हैं।

अगले महीने ब्लैकमून

जनवरी में सुपरमून की दो घटनाओं के बाद लोग फरवरी में ब्लैकमून भी देखेंगे। दरअसल फरवरी में २८ दिन होने की वजह से इस बार पूर्णिमा यानी फुलमून की घटना नहीं होगी। इसे खगोलीय भाषा में ब्लैक मून कहा जाता है।


वर्ष २०१८ की चंद्रमा विशेष घटनाएं

- २ जनवरी: सुपरमून
- १७ जनवरी: माइक्रोमून
- ३१ जनवरी: पूर्ण चंद्रग्रहण
- ३१ जनवरी: ब्लूमून
- फरवरी: ब्लैकमून
- ३१ मार्च: ब्लूमून
- १३ जुलाई: सुपर न्यू मून
- २७ जुलाई: पूर्ण चंद्रग्रहण
- २८ जुलाई: माइक्रो फुलमून
- ११ अगस्त: सुपर न्यूमून

परंपरागत महीनेवार पूर्णिमा के नाम


महीने का नाम -------- पूर्णिमा का नाम
जनवरी -------- वोल्फमून (भेडि़या)
फरवरी -------- स्नोमून (बर्फ)
मार्च -------- वर्ममून (कीड़ा)
अप्रेल -------- पिंकमून (गुलाबी )
मई -------- फ्लॉवरमून (फूल)
जून -------- स्ट्रॉबेरी मून (एक फल)
जुलाई -------- बकमून (हिरण)
अगस्त -------- स्टर्जिनमून (एक प्रकार की मछली)
सितम्बर -------- फूलकॉर्नमून (जई)
अक्टूबर -------- हंटर्समून (शिकारी)
नवम्बर -------- बीवरमून (ऊदबिलाव)
दिसम्बर -------- कोल्डमून (ठण्डा)

धोरों में हो सकता है बदलाव


सुपरमून के समय मरुस्थल में भी हवा चलेगी लेकिन इसकी गति समुद्रों पर चलने वाली हवा से काफी कम होगी। एेसे में हवा से धोरों की आकृति में बदलाव हो सकता है।

- प्रो. ओपीएन कल्ला, पूर्व उप निदेशक, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), जोधपुर