जब हौसले बुलंद हो तो हर काम संभव है। एक बहन अपने नि:शक्त भाई को घर में ही अक्षर ज्ञान दे रही है। वह भी गूंगे भाई को। ग्राम खैरझिटी की गंगा निषाद 13 वर्ष की है। वह गांव के स्कूल में कक्षा पांचवीं तक ही पढ़ाई कर पायी। क्योंकि उसका भाई राजेश निषाद 10 वर्ष का है, जो नि:शक्त होने के कारण बोल नहीं पाता है। भाई की देखरेख करने के लिए व गरीब परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण गंगा की पढ़ाई पांचवीं तक ही पहुंच पाई।
गंगा गांव के ही स्कूल में पढ़ती थी व होनहार छात्रा थी। अब गंगा अपने घर में ही मानसिक रुप से नि:शक्त भाई को पढ़ाती है व उसके देखरेख का जिम्मा भी बखूबी निभा रही है। पढ़ाई के साथ छोटे भाई को समय समय पर घुमने ले जाती है। साथ ही हर सुबह योग की क्लास लेती है। गंगा छोटे भाई को बहुत प्यार करती है। पिता को गर्व है गंगा पर, उसके हौसला से मां बाप के दुखों पर मरहम का काम कर रही है।
पिता तुलाराम ने बताया कि राजेश मानसिक रूप से नि:शक्त है, जिसके ईजाल कराने वह सक्षम नहीं है। वह शिविर में मदद के लिए कई बार जिला मुख्यालय की दौड़ लगा चुके हैं, लेकिन शिविर में केवल टाईसिकल ही मिल पाया। बाकि अपने रोजी मजदूरी का पैसा खर्च कर ईलाज कराना चाहा, लेकिन इसके लिए बड़ी राशि की आवश्यकता सुनकर कुछ नहीं कर पाए। पैसा की कमी के कारण अच्छा ईलाज नहीं हो पाया। शासन प्रशासन से मद्द की उम्मीद भी है।
गंगा अपने छोटे भाई राजेश के हर समय साथ रहती है। समय समय पर उसे आसपास टाईसिकल के सहारे घुमाने ले जाया करती है। रोज सुबह योग की क्लास लेती है। दिन में एक से दो घंटे अपने पुराने पुस्तक कापी निकालकर छोटे भाई को पढ़ाती है। अब उनकी मेहनत रंग लाती नजर आ रही है। भाई अब कापी में कलम रख कर अक्षर ज्ञान सिख रही है।
गंगा के इस हौसले से वह गांव के लिए मिशाल बन चुकी है। ज्ञान से ही जीवन में आगे बढ़ा जा सकता है इसके चलते ही भाई को ज्ञान दे रही है।