
CG Election 2018: खदानों का लोहा निगल रहा गरीब किसानों का खेत, जहर बना जल
कांकेर. अन्नदाताओं की फसलों को पिछले चार सालों से दीमक की तरह चाट रहा लोहा अब भानुप्रतापपुर विधानसभा के लिए अभिशाप बन गया है। आज स्थिति यह है कि कई हेक्टेयर फसल पूरी तरह तबाह हो गई है हाल ऐसा ही रहा तो, कुछ सालों में क्षेत्र के खेत पूरी बंजर हो जाएंगे। ऐसी ही स्थिति सरकारी योजनाओं की भी है, जिसका सफर कागजों से ही शुरू और कागजों पर ही खत्म हो जाता है। पढ़िए दुर्गूकोंदल से आकाश शुक्ल की ग्राउंड रिपोर्ट।
नलकूप उगल रहे लाल जहर
स्थिति का जायजा लेने पतली उबड़-खाबड़ पगडंडी से हाते हुए पत्रिका की टीम गोपालटोला पहुंची। जहां चैतूराम कमोटी, उदेराम आंचला, सनीराम कुमोटी,कमलेश मंडावी, संतोबाई, बृजलाल, राम सिंह दुग्गा, मनीराम कुमोटी, राजेशहुर्रा, मानसाय गावड़े अमलू फड़ो रमेश कुमोटी ने बताया कि गांव में पिछले 30 सालों से गंदे नाले का पानी मजबूरी में पी रहे हैं। नलकूप में लौहयुक्त लाल जहर निकलता है। जो पीना तो दूर हाथ तक धोने के लायक नहीं है। उन्होंने बताया कि सरपंच आते नहीं, विधायक कौन है, हमें तो नाम भी नहीं पता। गांव में 20 से अधिक बच्चे हैं लेकिन आंगनबाड़ी ही नहीं। पोक आहार न मिलने से यहां के बच्चे कुपोषण के शिकार हो रहे हैं। बीमार होने पर इलाज के लिए कोई साधन ही उपलब्ध नहीं।
सुस्त प्रशासन बेबस जनता
सुदेश दुग्गा, मंगल सिंह, राकेश के साथ ही कई किसानों ने बताया कि माइस शुरू होने से पहले प्रबंधन ने क्षेत्र के लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधा, शिक्षा, रोजी रोजगार देने के कई वादे किए थे, लेकिन आप देखें कि सीएसआर मद के तहत कोई भी काम नहीं हुआ। स्थानीय लोगों को रोजगार के नाम पर छला ही जा रहा है।दुर्गूकोंदल सरपंच संजू नरेटी, चैतू नरेटी, शोभित राम, उत्तरा वारे, बैजु नरेटी कहते हैं कि माइसं प्रभावित गांवों की स्थिति खराब होते जा रही है। इसके साथ ही नलकूप से निकलता लौह युक्त पानी लोगों को बीमार कर रही है। प्रशासन से कई बार वाटर फिल्टर लगाने की मांग की गई लेकिन नतीजा शून्य रहा। अब ग्रामीण विधानसभा चुनाव से पहले इन मुद्दों को लेकर मोर्चा खोल चुके हैं।
लोहा खाओ और लोहा कमाओ
दुर्गूकोंदल ब्लॉक के चाहचड़ गांव की घसनीन बाई, सुरेश दुग्गा, रामबती सुहरू राम दुग्गा, सुकरन, रजमन ने बताया कि रोजी रोजगार के नाम पर हमारे पास कुछ नहीं है। खेतों में फसल उगाकर जो भी हो गुजारा होता है। लेकिन मेड़ो पंचायत में माइंस शुरू होने के बाद चार साल से वहां का लौह युक्त पानी हमारे खेतों में आ रहा है। उपजाऊ मिट्टी पर जिस तरह से लौह तत्व जम गए हैं, इससे अब इन खेतों में फसल की उम्मीद ही नहीं की जा सकती। कई बार नाला बनाकर माइंस से निकलने वाले लाल पानी को दूसरी तरफ डायवर्ट करने की मांग की गई, लेकिन कोई सुनता ही नहीं। कलक्टर, मंत्री, विधायक से कई बार गुहार लगाई लेकिन आवाज दबा दिया जाता है।
Published on:
24 Oct 2018, 1:34 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.