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#Water Crisis: कांकेर में झरिया का गंदा पानी ही है इनका सहारा

कांकेर. बढ़ती जा रही गर्मी, होती जा रही पानी की समस्या। कहीं एक किमी दूर से तो, कहीं तो कहीं झरिया का गंदा पानी पीने के लिए मजबूर हैं। दुर्गूकोंदल ग्राम पंचायत के भुरूका गुदुम में तो ऐसी स्थिति बदतर है कि वहां दो फिट नीचे से झरिया का पानी लोग लाते हैं। वह पानी […]

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Chandu Nirmalkar

Apr 17, 2016

water crisis

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कांकेर.
बढ़ती जा रही गर्मी, होती जा रही पानी की समस्या। कहीं एक किमी दूर से तो, कहीं तो कहीं झरिया का गंदा पानी पीने के लिए मजबूर हैं। दुर्गूकोंदल ग्राम पंचायत के भुरूका गुदुम में तो ऐसी स्थिति बदतर है कि वहां दो फिट नीचे से झरिया का पानी लोग लाते हैं। वह पानी इतना गंदा है कि कोई भी बाहर का आदमी उस पानी को पी नहीं सकता लेकिन उस गांव के लोग उसी पानी को पीने के लिए मजबूर हैं। यह तब स्थिति है, जब उस गांव में चार हैंडपंप हैं, लेकिन कोई भी ठीक हालत में नहीं है।


मारकट्टा, ग्राम पंचायत पोरोंडी, ब्लाक कोयलीबेड़ा ऐसा गांव है, जहां दो नल हैं लेकिन दोनों खराब हैं और उप सरपंच ने गांव के लिए एक मात्र कुएं में अपने पंप की पाइप लगा रखी है, जिससे खेत की सिंचाई करता है। वह कुंआ भी कब सूख जाय, भरोसा नहीं। यह तो सिर्फ उदाहरण मात्र है, इसके अलावा भी कई गांव ऐसे हैं, जहां लोग बूंद-बंूद पानी के लिए तरस रहे हैं।


साधूमिचगांव ग्राम पंचायत के गोपालटोला में 10 घर हैं। यहां एक हैंडपम्प है, आधा घंटा चलाने के बाद उससे पानी थोड़ा-थोड़ा निकलता है। आश्रित गांव का ग्राम पंचायत साधूमिचगांव यहां से 10 किमी दूर है। गांव वालों ने सरपंच से कहा लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। रेनु राम, बृजलाल, दसनी बाई, मुरी बाई आदि ने बताया कि झरिया भी सूख जाने के कारण काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।


चार नल, सभी खराब

ग्राम पंचायत दुर्गूकोंदल के आश्रित गांव भुरूकागुदुम में तो चार नल हैं। दो नलों से पानी गाढ़ा लाल निकलता है, जबकि दो नल से पानी ही नहीं आता। नदी में एक झरिया है, लगभग 200 फिट की गहराई में, वह भी लगभग सूख चुका है। उसमें से भी गंदा पानी निकलता है, जिसे पीकर लोग आए दिन बीमार पड़ते हैं, यह ऐसा गांव है, जहां के लौह अयस्क के माध्यम से सरकार को हर वर्ष करोड़ों का राजस्व जाता है। लोगों ने इसके लिए सरपंच से भी गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। गांव के छबीलाल, जागेश्वर, मानसिंग, मेनसिंह, समारू, राम जी, सरस्वती, बज्जो, नंदेश्वरी, अनोतिन शिव बत्ती, फुतमा आदि ने बताया कि पानी के लिए कई बार सरपंच से कह चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।


जंगल के बीच बसे सुभानीखेड़ेगांव गांव की स्थिति और दयनीय है। यहां सड़क तो पहले से नदारद है। बूंद-बूंद पानी के लिए भी लोग तरस रहे हैं। लगभग 35 घर इस गांव में हैं और एक झरिया है, जिससे सुबह ही लोग पानी भरने के लिए जुट जाते हैं। इस गांव में नल खराब पड़ा हुआ है।


इसके अलावा लाट मरका, नियोंडाडीह, सराधु धमरे, मेट्टा घमरे, जुई में भी पानी की समस्या है। यह बता दें कि लाट मरका में जल स्रोत कम होने के कारण जल संकट है। यहां हैंडपम्प लगे होने के बावजूद खराब हो चुका है। नियोंडाडीह और सराधु धमरे, मेट्टा घमरे में भी स्थिति भयावह है। जुई में लोग आज भी झरिया का पानी पीने के लिए मजबूर हैं। आए दिन बीमार पड़ते रहते हैं लेकिन यहां कोई सुनवाई नहीं हो रही, जिससे लोगों का आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है।


हर पंचायत को पर्याप्त राशि

हर ग्राम पंचायत को पर्याप्त राशि मुहैया करा दी गई है। वे अपने स्तर से पानी की व्यवस्था ठीक कर सकते हैं। इसके बावजूद यदि कहीं पानी की व्यवस्था पंचायत नहीं करवा पा रही है तो फिर हम वहां जांच करवाकर पानी की व्यवस्था जल्द मुहैया कराएंगे।

चंदन कुमार, सीईओ, जिला पंचायत, कांकेर

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