
हर साल पांच नदियों के कारण किसानों के हो रहे फसल बर्बाद, पीड़ितों की फरियाद सुनने वाला कोई नही
कांकेर. नरहरपुर, चारामा व कांकेर ब्लॉक की पांच नदियों में हर साल कटाव होने के चलते सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि तबाह हो चुकी है। सैकड़ों किसानों के खेत नदी में तब्दील हो गए हैं। किसानों की गुहार पर दो साल पहले नदियों के कटाव से रोकने के लिए जिला प्रशासन ने बाढ़ नियंत्रण शाखा रायपुर को 1086.04 करोड़ का प्रस्ताव भेजा था। स्थानीय जन प्रतिनिधियों की निष्क्रियता के चलते न तो शासन ने स्वीकार किया न ही इस पर पहल की जा रही है। नदियों के कटाव के चलते किसानों का बड़ा नुकसान हो रहा है। पीडि़तों की फरियाद के बाद भी नदियों में कटाव रोकने कोई पहल नहीं होने से किसानों की आस टूटती जा रही है।
नरहरपुर ब्लॉक के करप, बुदेली, मरकाटोला, बागोड़ और साल्हेटोला बाबू और कांकेर ब्लॉक में ग्राम पंचायत कन्हारपरी, पोटगांव, सिलतरा, मरकाटोला (पत्तेचंद), सिदेसर, बागोडार, नारा, माकड़ी, नांदनमारा, देवरी, मुरडोंगरी, पीढ़ापाल, कानागांव, अंजनी, बेवरती और सातलोर गांव में महानदी एवं उसकी अन्य चार सहायक नदियों में बारिश के दिनों में बहाव तेज होने के कारण किसानों की सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि नदी में समा चुकी है। किसान नेता आशीष दत्ताराय ने बताया कि नदियों के तट पर किसानों के खेतों में हर साल कटाव बढ़ता जा रहा है। अब तक सैकडों एकड़ खेत नदी में तब्दील हो चुका है।
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग का दो साल पहले किसानों ने घेराव किया तो जिला प्रशासन ने 10 करोड़ 86 लाख चार हजार रुपए का प्राकलन तैयार कर शासन को भेज दिया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता के चलते आज तक न तो किसानों की जमीन बचाने के लिए पहल हुई और न ही प्रशासन ने किसानों के नदी के पानी से खेतों के कटाव कम करने उपाय किया।
शासन को भेजा 10.86 करोड़ का प्रस्ताव :- किसान नेता चमरा नेताम, चंद्रिका प्रसाद, रामकरण कुंजाम, मनराखन मरकाम, चंद्र प्रकाश ठाकुर, उर्मिला, चंद्रप्रकाश ठाकुर, सुरेंद्र नेताम, आसाराम नेताम, वनियाराम नेताम, जयंत नेताम, रामचरण कोर्राम, मुन्नाराम और रामचरण सिन्हा ने बताया कि महानदी एवं चार अन्य सहायक नदियों में कृषि भूमि कटाव रोकने के लिए शासन-प्रशासन को अवगत करा चुके हैं। किसानों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए शासन को जिला प्रशासन ने दस करोड़ 86 लाख का प्रस्ताव भेजकर चुप्पी साध लिया है और किसान परेशान हैं।
पिचिंग होने से कटाव कम होगा :- सबसे अधिक कृषि भूमि महानदी में किसानों की समा चुकी है। नदी में जलस्तर बढ़ते ही आसपास के खेतों में कटाव बढऩे लगता है। नदी के मोड़ पर सबसे अधिक खतरा बना रहता है।
नदी में पानी की रफ्तार कम करने के लिए पिचिंग होने से इस पर रोकथाम कुछ हद तक लग सकती है। नदी में छोटे-छोट स्टॉपडेम बना देेने से कटाव रुकेगा। दसपुर के किसानों ने बताया कि हर साल नदी की चौड़ाई बढ़ती ही जा रही है। प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दिया तो कृषि भूमि का कटाव बढ़ेगा औ कृषि भूमि तबाह होगी। अब तक सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि नदी में तब्दील हो चुकी है।
Published on:
29 Jul 2018 12:32 pm

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