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इस मंदिर के 362 दिन बंद रहते हैं पट

नवरात्र का आज चौथा दिन है, लेकिन यहां एक ऐसा देवी मां का मंदिर है, जहां सिर्फ चैत नवरात्र के सत्तमी, अष्टमी और नौवमी के दिन ही पट खुलते हैं

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Ruchi Sharma

Apr 11, 2016

Pooja

Pooja

कानपुर.नवरात्र का आज चौथा दिन है, लेकिन यहां एक ऐसा देवी मां का मंदिर है, जहां सिर्फ चैत नवरात्र के सत्तमी, अष्टमी और नौवमी के दिन ही पट खुलते हैं, बाकि 362 दिन मंदिर पर ताला लटका रहता है। शहर के बीचों-बीच भीड़भाड़ वाले कोतवाली क्षेत्र के निकट शिवाला में स्थित 'छिन्नमस्तिका देवी मंदिर' के द्वार नवरात्रों के दौरान सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दिन खोले जाते हैं। यहां मां पार्वती के रूप में स्थित देवी की प्रतिमा धड़विहीन है जबकि उससे निकलने वाली रक्त की तीन धारायें उनकी सहचरियों की प्यास बुझाते दिखती है।

जब मां ने अपना शीश किया छिन्न-भिन्न

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार सृष्टि निर्माण की अभिलाषा मन में संजोये मां पार्वती एक दिन अपनी दो सहचरियों डाकिनी और वर्णिनी के साथ मंदाकिनी नदी में स्नान कर रही थी कि इस बीच उन्हें काम और रति सहवास क्रीडा करते दिखे। यह देखकर
मां तथा सहचरियों के कंठ अचरज के कारण सूख गये। माता पार्वती ने अपने नाखूनों से अपना शीश छिन्न-भिन्न कर दिया। मां के कटे शीश से रक्त की तीन धाराये गिरी जिससे मां और सहचरियों ने अपनी प्यास बुझाई। विश्व में माता के इस रूप को छिन्नमस्तिका के रूप में जाना गया।

सत्तमी के दिन भोर पहर दी जाती है बकरे की बलि

मंदिर प्रबंधक ने बताया कि कलयुग की देवी के रूप में विख्यात देवी के मंदिर के पट सप्तमी को खुलते है। जहां भोर में बकरे
की बलि दी जाती है तथा कटे सर पर कपूर रखकर मां की आरती की जाती है और नारियल फोड़ा जाता है। उन्होंने बताया कि मंदिर में 23 महादेवियों के साथ 10 महाविद्यायें विराजमान है। मां का मूलनिवास झारखंड में हजारीबाग जिले के राजरप्पा में स्थित है। मंदिर प्रबंधक ने आम श्रद्धालुओं के लिये मंदिर के द्वार बंद किए जाने के बारे कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि हालांकि मंदिर में पूजन पाठ पहले के सालों की तरह ही होता है। सप्तमी, अष्टमी और नवमी को पूरे विधिविधान से पूजा करने के बाद मंदिर के द्वार बंद कर दिये जाते हैं।

...तो इसलिए रहते हैं मंदिर के द्वार बंद

इस बीच, मंदिर प्रशासन से जुडे सूत्रों ने बताया कि मंदिर को आम श्रद्धालुओं के लिये बंद करना वास्तव में मंदिर की देखभाल में लगे दो परिवारों के वर्चस्व को लेकर आपसी मनमुटाव का नतीजा है। जिसका खामियाजा हजारों की तादाद में श्रद्धालुओं को उठाना पड़ रहा है। वहीं मंदिर के ट्रस्टी रमेश प्रलाद ने बताया कि ऐसा कोई मामला नहीं है। मंदिर के पट माता रानी के आदेश के तहत 362 दिन के लिए बंद कर दिए जाते हैं।

बताया, मां ने सपने में आकर मंदिर के पट बंद करने के लिए कहा और उन्हीं के आदेश पर अमल करते हुए मंदिर के पट पर ताला लटका रहता है। इससे पहले श्रद्धालु मनौती के लिये दो सेब तथा एक कलावा लेकर आते है और उसमें से एक सेब मां के चरणों में रख निवेदन किया जाता था और कलावा मंदिर के पुजारी से बंधवाया जाता था। यह कलावा मन्नत पूरी होने तक श्रद्धालु कलाई में बांधे रहते थे।

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