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डीएम के फर्जी हस्ताक्षर से 90 रसूखदारों के बना दिए गए शस्त्र लाइसेंस

जांच में फंसेंगे कई बड़े अफसर, जांच रिपोर्ट के बाद दर्ज होगी एफआईआर तोड़ी जाएगी लिपिक की अलमारी, बाहर आएंगे कई बड़े राज

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डीएम के फर्जी हस्ताक्षर से 90 रसूखदारों के बना दिए गए शस्त्र लाइसेंस

कानपुर। जिलाधिकारी की नाक के नीचे उनके फर्जी हस्ताक्षरों से असलहा लाइसेंस जारी करने का खेल चलता रहा और जिसकी भनक देर से लगी। इस दौरान ९० ऐसे लोगों के शस्त्र लाइसेंस जारी कर दिए गए जो सीधे तरीके से शायद बन ही नहीं पाते। जालसाजों ने बड़े ही शातिर तरीके से जाल बुना और डीएम के हस्ताक्षर के साथ खेल किया गया। फर्जी लाइसेंस कैसे जारी कराए गए, इसे लेकर चार बिन्दुओं पर सीडीओ अक्षय त्रिपाठी की जांच आगे बढ़ रही है। जबकि लिपिक विनीत की अलमारी तोड़े जाने की तैयारी है, जिससे कई राज बाहर आने की सम्भावनाएं भी जताई गई है।

लाइसेंस जारी करने की यह थी प्रक्रिया
लाइसेंस जारी कराने की प्रक्रिया में सबसे पहले पत्रवाली को संकलित किया जाता है। जिसमें पुलिस और तहसील की रिपोर्ट होती है। इसे संकलित करने का काम असलहा विभाग से सम्बद्ध लिपिक संजय का था। पत्रावली संकलित करने के बाद वह उसे एडीएम सिटी से स्वीकृत कराता था। एडीएम सिटी के हस्ताक्षर के बाद वह फाइल डीएम के पास जाती थी और डीएम के यहां से फाइनल स्वीकृति होने के बाद वह वापस असलहा विभाग आती थी। इसके बाद यह स्वीकृत फाइल लिपिक विनीत तिवारी को सौंप दी जाती थी। वह इसे लेकर सिटी मजिस्ट्रेट के पास जाता और वहां पर सिटी मजिस्ट्रेट से हस्ताक्षर कराने के बाद बुकलेट जारी करा दी जाती थी।

जारी किया जाएगा नोटिस
डीएम ने कहा कि जिन 73 लोगों को बुकलेट जारी कर दी गई है, उन्हें नोटिस जारी कर बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया जाएगा। फर्जी तरह से जारी किए गए सभी 90 लाइसेंसों को निरस्त किया जाएगा। जो बुकलेट ले जा चुके हैं, उनसे यह भी पूछा जाएगा कि उन्होंने लाइसेंस कैसे बनवाया। जिन 73 की बुकलेट जारी कर दी गई है इसमें सिटी मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर मौजूद हैं। सीडीओ ने बताया कि प्रारम्भिक जांच में चार बिन्दुओं पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि स्वीकृत फाइल में डीएम के फर्जी हस्ताक्षर बनाए गए होंगे या फिर उनके हस्ताक्षरों को कहीं से स्कैन कराकर फाइलों में पेस्ट किया गया होगा। जिलाधिकारी विजय विश्वास पंत ने बताया कि 90 लाइसेंसों में कुछ गड़बड़ी हुई है। मुख्य विकास अधिकारी की जांच में इसके बारे में पूरी जानकारी निकल आएगी। उनकी जांच रिपोर्ट आने के बाद जो लाइसेंस फर्जी तरह से जारी हुए हैं उन्हें निरस्त किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद एफआईआर दर्ज करा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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