IIT कानपुर ने तैयार कर लिया अस्त्र, HAL के विमान से होगी कृत्रिम बारिश


मेक-इन-इंडिया के तहत आईआईटी कानपुर ने तैयार किया प्रोजेक्ट, एचएल ने दिया विमान और इसी के जरिए पूरे साल होगी कृत्रिम बारिश।

 

By: Vinod Nigam

Updated: 02 Mar 2019, 01:04 PM IST

Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

कानपुर। आईआईटी कानपुर के चलते अब किसानों की फसल बर्बाद नहीं होंगी। क्योंकि संस्थाल ने देश मे बने सभी साजोसामान से कृत्रिम बारिश कराने का तमगा हासिल कर लिया है। सभी उपकरण मेक-इन-इंडिया के तहत तैयार किए गए हैं। अगले माह वैज्ञानिक बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त जिलों में इससे कृत्रिम बारिश करवाएंगे। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने संस्थान को भारत मे निर्मित ड्रोनियर डीओ 228 विशेष विमान दे दिया है।

बुंदेलखंड में आई खुशहाली
प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सरकार बननें के बाद बारिश नहीं होने से फसल बर्बादी की समस्या से निपटने के लिए आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों के साथ बैठक की थी। इसी दौरान संस्थान के वैज्ञानिकों ने कृत्रिम वर्षा के लिए हामी भर अपने प्रोजेक्ट पर कार्य करना शुरू कर दिया था। जो अब बनकर तैयार हो गया है। संस्थान की मांग पर एचएएल ने एक विमान तैयार कर उन्हें सौंप दिया है। अब इसी विमान से ही देश मे कृत्रिम बारिश होगी। पहले चरण में बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त जिलों को चुना गया है। जहां इसी वर्ष कृत्रिम बारिश करा किसानों की फसल की बोवनी कराई जाएगी।

6 विभागों के सेक्रेटरी शामिल
कृत्रिम बारिश कराने वाली आईआईटी की टीम को लीड कर रहे प्रोफेसर सच्चिदानंद त्रिपाठी ने बताया कि उनकी तकनीक का प्रयोग कृत्रिम बारिश कराने के साथ वाटर मैनेजमेंट , पर्यावरण का सर्वे करना और हवा में फैले प्रदूषण को दूर करना होगा । इस कमेटी में 6 विभागों के सेक्रेटरी शामिल है । सबसे पहले उत्तर प्रदेश के सूखा ग्रस्त इलाके बुलदेलखण्ड में क्लाउड सीडिंग कराकर कृत्रिम बारिश कराई जाएगी । भारत मे निर्मित विमान एचएएल ने आईआईटी को दिया है अब इस विमान में आईआईटी अब अपने उपकरण फिट करेगा जिससे कृत्रिम बारिश कराई जाएगी।

पूरे साल कृत्रिम बारिश
प्रोफेसर सच्चिदानंद त्रिपाठी ने बताया कि पहले कृत्रिम बारिश कराने में करीब 60 करोड़ रुपए खर्च होते थे। इतने बजट में बमुश्किल दो से तीन बार बारिश हो पाती थी। पर अब भारत निर्मित सभी उपकरणों से तैयार प्रोजेक्ट के जरिए जितनी चाहें, उतनी कृत्रिम वर्षा होगी। आईआईटी कानपुर के डिप्टी डायरेक्टर मणीन्द्र अग्रवाल ने बताया कि कृत्रिम बारिश कराना आईआईटी की एक बड़ी उपलब्धि है । एयर क्राफ्ट पहले इसरो से मांगा था जो नही मिल पाया इसके बाद एचएएल से संपर्क किया तो जरूरत के हिसाब से एचएएल ने भारत मे निर्मित एयर क्राफ्ट बनाकर आईआईटी कानपुर को सौंपा है।

तो आईआईटी ने उठाया बीणा
सीएसए में आए प्रदेश के सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया था कि कृत्रिम बारिश का प्रयोग उन क्षेत्रों में किया जाएगा, जहां पर बारिश नहीं होने से किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचता है। इस तकनीक से फसलों को सूखे से राहत मिलेगी। 2017 में महोबा क्षेत्र में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए चीन से कृत्रिम बारिश कराने की योजना बनी थी। उस समय चीन से एक किलोमीटर क्षेत्र में कृत्रिम बारिश के लिए 10.30 लाख की राशि देने पर सहमति भी हो गई थी। फिर अचानक चीन ने अपनी कृत्रिम बारिश की तकनीक देने से मना कर दिया। अब आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों की तरफ से तैयार की गई कृत्रिम बारिश की तकनीक से सूखे से निपटने में काफी आसानी होगी।

 

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