मगर कानपुर के आजाद नगर में रहने वाली आशा और जाजमऊ की शबाना की दोस्ती गंगाण-जमुनी तहजीब की मिसाल है। आशा पिछले दस सालों से रोजा रखती आ रही हैं तो शबाना इतने ही समय से कंपनी बाग चौराहे पर स्थित साईं मंदिर में भंडारा कराकर भूखे लोगों का पेट भर रही हैं। दोनों का मकसद है, आपसी भाईचारे का संदेश देना, गरीब लोगों की मदद करना। इतना ही नहीं दोनों ही सहेलियां एक दूसरे के त्योहार में शरीक होती हैं। परिवार के लोग भी एकण-दूसरे के यहां आते जाते हैं।