
भाऊपुर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर हुआ रद, किसानों ने मांगा था पांच गुना मुआवजा
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
कानपुर. जिले के भाऊपुर में इंडस्ट्रियल कारिडोर (Industrial Cooridor) की स्थापना पर अब ग्रहण लग गया है। हालांकि एक साल पहले ही 2019 में ही यह प्रोजेक्ट (Industrial Corridor Project) पर संकट आ खड़ा हुआ था। जब भाऊपुर व आसपास के गांवों के किसान बाजार रेट और सर्किल रेट में जो अधिक हो उसका पांच से छह गुना (Farmers Compensation) तक मुआवजा मांग रहे थे। जबकि यूपीसीडा (UPSIDA) पांच साल की किश्तों में सात गुना मुआवजा देने को तैयार था, लेकिन दोनो के बीच सहमति नहीं बन सकी। फिलहाल अब इसे शासन स्तर से रद कर दिया गया है। क्योंकि भूमि अधिसूचित है, ऐसे में भविष्य में औद्योगिक क्षेत्र बसाने की आवश्यकता पड़ने पर फिर से किसानों से बात करनी पड़ेगी।
पांच साल पहले भूमि अधिसूचित करने पर तय किया गया था कि भाऊपुर में इंवेस्टमेंट मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर की स्थापना होगी। इसमें लाजिस्टिक पार्क, डिफेंस से जुड़ी इकाई, लेदर और फार्मा इंडस्ट्री से जुड़े उद्योग लगेंगे। यहां वैसे तो 22 गांवों की 20 हजार एकड़ भूमि अधिसूचित की गई थी, लेकिन प्रथम चरण में 2724 एकड़ भूमि पर क्लस्टर स्थापित होगा। इस भूमि में 402 एकड़ भूमि ग्राम समाज की है। ऐसे में यह भूमि प्राधिकरण को निशुल्क या सर्किल रेट पर मिल जाती। ग्राम समाज की भूमि के पुनर्ग्रहण का प्रस्ताव भी प्रबंधन ने प्रशासन को दिया था और फिर किसानों से मुआवजे को लेकर बात शुरू की थी। मगर किसान पांच से छह गुना मुआवजा मांगने लगे।
प्रबंधन ने किश्तों में सात गुना तक मुआवजा देने की बात कही लेकिन किसान तैयार नहीं हुए। और 2018 में प्रोजेक्ट की फाइल बंद हो गई। हालांकि इस प्रोजेक्ट से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता और कानपुर के औद्योगिक क्षेत्र को चार चांद लग जाते। साथ ही लाजिस्टिक पार्क बनने से शहर के उद्यमी भी अपना माल वहां रख सकते थे और वहीं से कोलकाता या मुंबई के बंदरगाहों तक भेज देते। अब भारत सरकार को इस क्लस्टर के लिए प्रयागराज के नैनी स्थित सरस्वती हाईटेक सिटी और आगरा में थीम पार्क की एक हजार एकड़ भूमि का प्रस्ताव भेजा गया है।
Published on:
10 Jun 2021 05:31 pm

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