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कानपुर-दिल्ली मार्ग बनेगा ग्रीन हाईवे, रास्ते में मिलेंगे बायो सीएनजी व बायोडीजल पंप

बायो ईंधन के इस्तेमाल से दूर होगा प्रदूषण, कई और हाईवे भी प्रोजेक्ट में शामिल

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कानपुर-दिल्ली मार्ग बनेगा ग्रीन हाईवे, रास्ते में मिलेंगे बायो सीएनजी व बायोडीजल पंप

कानपुर-दिल्ली मार्ग बनेगा ग्रीन हाईवे, रास्ते में मिलेंगे बायो सीएनजी व बायोडीजल पंप

कानपुर। जल्द ही आपको कानपुर-दिल्ली हाईवे पर बायो सीएनजी व बायोडीजल मिल सकेगा। जनवरी में इनकी शुरूआत हो जाएगी। सरकार इस दिशा में तेजी से काम करा रही है। इससे कानपुर से दिल्ली के मार्ग पर प्रदूषण कम हो सकेगा। इसके बाद लखनऊ-सीतापुर-दिल्ली हाईवे को भी ग्रीन हाईवे के प्रोजेक्ट में शामिल किया जाएगा। कानपुर से प्रयागराज, वाराणसी होते हुए कोलकाता जाने वाले हाईवे को भी ग्रीन हाईवे के रूप में विकसित किया जाना प्रस्तावित है।

ग्रीन हाईवे बनाने की तैयारी शुरू
कानपुर-दिल्ली हाईवे को ग्रीन हाईवे बनाने का कार्य शुरू हो गया है। सरकार देश के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गो को ग्रीन हाईवे के रूप में विकसित करना चाहती है। इसी दिशा में दिल्ली-कानपुर हाईवे से शुरूआत की जा रही है। जनवरी में तीन स्थानों पर बायो सीएनजी व बायोडीजल के पंप शुरू हो जाएंगे। इसके लिए विभिन्न कंपनियों को बायो सीएनजी, सीएनजी व बायोडीजल के पंप लगाने के लिए कहा गया है।

कानपुर में इन स्थानों पर लगेंगे पंप
हाईवे ग्रीन बायो फ्यूल्स कारपोरेशन द्वारा कानपुर-दिल्ली हाईवे को ग्रीन हाईवे के रूप में विकसित किया जा रहा है। कानपुर से इटावा और आगरा होते हुए दिल्ली जाने वाले हाईवे पर 15 जगह पर बायो सीएनजी व बायो डीजल के पंप बनाए जाने हैं। कानपुर में सनिगवां, देहात में सिकंदरा, औरैया में सिकरोड़ी रोड में बायो सीएनजी व बायो डीजल पंप लगने का काम शुरू हो गया है। इनमें जनवरी से बायो डीजल मिलने लगेगा।

यहंा बायो सीएनजी का होगा उत्पादन
हाईवे ग्रीन बायो फ्यूल्स कारपोरेशन कानपुर के अलावा चकरपुर, इटावा के भवानीपुर और अलीगढ़ के ताखा में भी बायो सीएनजी का उत्पादन करेगी। इन जगहों पर प्लांट स्थापना का कार्य शुरू किया जा रहा है। इन प्लांटों में 16 हजार किलो सीएनजी रोज बनेगी। इस पूरे प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश जैव ऊर्जा विकास बोर्ड मदद कर रहा है। कंपनी निदेशक नितिन चौधरी ने बताया कि चकरपुर के पास प्लांट में रोज सौ टन गोबर, कृषि अपशिष्ट आदि कचरा इस्तेमाल किया जाएगा। इससे आठ हजार किलो गैस रोज बनेगी। भवानीपुर में 50 टन चावल की भूसी, कृषि अपशिष्ट और ताखा के प्लांट में चीनी मिल से निकलने वाले 50 टन अपशिष्ट का प्रयोग किया जाएगा। चार-चार हजार किलो गैस रोज बनेगी।

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