
कर्मचारियों और पेंशनरों को ३५ की जगह २४ बीमारियों का ही मिलेगा कैशलेस इलाज
कानपुर। सरकार ने कैशलेस इलाज में क्षतिपूर्ति की व्यवस्था बंद करने के संकेत दे दिए हैं। सरकार ने कर्मचारियों को दी जानी वाली कैशलेस इलाज का नाम समाजवादी से बदलकर दीन दयाल उपाध्याय स्वास्थ्य योजना कर दिया है। अब योजना में सिर्फ 24 बीमारियां ही शामिल की गई हैं जबकि पहले इसमें 36 बीमारियों को लेने पर सहमति बनी थी। शासन ने इसमें बीमारी और कर्मचारी के कितने सदस्यों को इलाज दिया जाए, उसका फैसला कर लिया है। अस्पतालों की सूची बनाने का काम स्वास्थ्य विभाग को दिया गया है। शासन ने सीजीएचएस से हटकर अस्पतालों की सूची बनाने की मंशा जाहिर की है जिस पर कर्मचारी संगठनों ने भी सहमति जता दी है।
वेबसाइट बंद होने से परेशानी
कैशलेस इलाज देने के लिए हर जिले में अस्पतालों के चिन्हांकन का काम शुरू हो गया है, लेकिन रजिस्ट्रेशन की वेबसाइट बंद होने से कर्मचारी संशय में हैं। अभी तक 3.5 लाख कर्मचारियों का योजना में रजिस्ट्रेशन हो सका है जबकि पेंशनर्स समेत उनकी संख्या 14 लाख है। प्रभारी मुख्य सचिव से इस संबंध में हाल में ही वार्ता की गई है। जिसमें उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को जिलावार अस्पतालों की सूची बनाने को कहा है लेकिन काम काफी धीमा हो रहा है। इसकी आपत्ति भी सरकार के समक्ष दर्ज करा दी गई है। वेबसाइट बंद होने से कर्मचारियों की दुविधा बढ़ती जा रही है इसलिए जल्द ही इस मसले पर फिर से सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों से की जाएगी।
प्रदेश के बाहर के हॉस्पिटल भी शामिल
कर्मचारी संयुक्त परिषद के संरक्षक भूपेश अवस्थी का कहना है कि योजना का प्रारूप लगभग बन गया है। सिर्फ जिलावार अस्पतालों की सूची बननी है। अस्पतालों की सूची में प्रदेश से बाहर के सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटलों को भी लिया जा रहा है क्योंकि इन्हीं अस्पतालों में गंभीर मरीजों का इलाज संभव है।
इन बीमारियों का मिलेगा इलाज
कैशलेस इलाज में अब कैंसर, लिवर-किडनी-घुटना-कूल्हा प्रत्यारोपण, हृदय रोग, हेपेटाइटिस, मोतियाबिंद, नेत्र रोग, एक्सीडेंट में ऑपरेशन, टीबी, श्वांस रोग, हड्डी रोग, नेफ्रो रोग समेत २४ बीमारियां शामिल की गई हैं। नई गाइड लाइन में कर्मचारी और उसकी पत्नी के साथ दो बच्चों को भी शामिल किया गया है। परिवार के चार लोगों को ही कैशलेस इलाज देने की व्यवस्था की गई है।
Published on:
16 Sept 2019 01:53 pm
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