
अब झूठे रेप केस में नहीं फसेंगे मर्द, महिलाओं से पीड़ित पुरूषों के लिए बड़ी राहत
कानपुर. हिन्दी फिल्म 'ऐतराज' रूपहले पर्दे पर आई थी, जिसमें एक्टर को साजिशन रेप केस में फंसाया जाता है, लेकिन उसकी वकील पत्नी भरी अदालत में साबित कर देती है कि रेप का यह मामला किस कदर झूठा था। भले ही असल जिन्दगी में इस तरह के केस अदालत की चौखट तक न पहुंचें हों लेकिन 'दामन वेलफेयर सोसाइटी' नामक एनजीओ ने अब महिलाओं से पीड़ित मर्दों को न्याय दिलाने के लिए आगे हैं। एनजीओ को बलात्कार जैसे अपराध के लिये केवल पुरूषों को जिम्मेदार ठहराए जाने पर सख्त एतराज जताते हुए आवाज उठाई है। एनजीओ ने देश में मेपलटन रेप लॉ (डंचसमजवद तंचम सूं) बनाने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अध्यक्ष अनुपम दुबे का कहना है कि बलात्कार के मामलों में देश के क्रिमिनल कानून समानता पर आधारित नहीं है। घरेलू हिंसा, दहेज हत्या और रेप के लिये बने कानूनों का दुरूपयोग रोकने और पीड़ित पुरूषों की मदद के लिये हेल्प लाईन सेवा शुरू की गई है। इस हेल्प लाईन के जरिये 'मर्द बिरादरी' के हर उस शख्स की मदद की जायगी जो महिलाओं की साजिश का शिकार हो रहे हैं।
पुरूषों के लिए जारी किया हेल्पलाइन नंबर
महिलाओं की सिजश के शिकार मर्दो की आवाज उठाने के लिए एक संस्था खड़ी हो गई है। संस्था ने महिलाओं से पीड़ित पुरूषों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है, जिसके जरिए इससे मदद मांगी जा सकती है। दामन वेलफेयर सोसाईटी के अध्यक्ष अनुपम दुबे का कहना है कि पिछले दो वर्षो के दौरान केवल कानपुर में सजिश के तहत पुरूषों पर मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा गया है और बिना किसी गुनाह के सजा भुगत रहे हैं। साथ कोर्ट ने तमाम मामलों में पुरूषों पर लगाये गये आरोप कोर्ट में झूठे पाये गये हैं। अध्यक्ष अनुपम दुबे ने बताया कि अभी दो दिन पहले एक युवक ने युवती की ब्लैमेलिंग के चलते मोबाइल के जरिए पूरी कहना बयां कर आत्महत्या कर ली। ऐसे मामलों पर अंकुश लगे और जो भी गलत करे उसे सजा मिले। इसी के लिए हमलोगों ने एनजीओ बनाया है।
पुरूषों के आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी
दामन की टीम का कहना है कि झूठे आरोपों से लज्जित पुरूष कई बार आत्महत्या तक कर लेते हैं। अब हेल्प लाईन के जरिये समाज के सताये ऐसे पुरूष उनसे सम्पर्क साधते हैं। इस एनजीओ द्वारा पीड़ित पुरूष को लीगल हेल्प और काउन्सिलिंग दी जाती है। दामन सोसाईटी की मदद से परेशानी से उबरने वाले कई पीड़ित पुरूष अब खुद इस सोसाईटी से जुड़ गये हैं और अपने जैसे दूसरे पीड़ित मर्द का सहारा बन रहे हैं। ‘‘टीम दामन’’ का कहना है कि देश में मेपलेटन कानून बनाने की दिशा में कदम उठाये जा रहे हैं। अभी तक इस तरह के कानून केवल उन देशों में लागू हैं, जहॉ बलात्कार कानून केवल महिलाओं व पुरूषों को समान संरक्षण देते हैं। टीम दामन का कहना है कि चूॅकि भारत का क्रिमिनल लॉ केवल महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करता है इसलिये यहॉ मेपलेटन कानून बनाया जाना औचित्यहीन है और उनकी पुरूष बिरादरी इसका विरोध करेगी।
80 हजार से ज्यादा पुरूषों को दिलाया न्याय
अध्यक्ष अनुपम दुबे का कहना है दामन जिसका अर्थ है, ‘डाउरी एक्ट मिसयूज एबालिशन नेटवर्क, । इस संस्था ने पिछले दो वर्षो में 80 हजार से अधिक मामलों में पीड़ित पुरूषों की मदद करने का दावा किया है। संस्था के अध्यक्ष का कहना है कि देश का कोई कोना हो, हर धर्म, हर भाषा और हर राज्य की मर्द बिरादरी को वे एक नजर से देखते हैं और उसकी मदद के लिये तैयार रहते हैं। दामन का दावा है कि उनका अन्तिम लक्ष्य मर्द व औरत को लड़ाना नहीं बल्कि पति पत्नी के बीच विश्वास कायम कराकर परिवारों को बिखरने से बचाना है। अपने इस लक्ष्य को लेकर उसने इन दिनों कानपुर में शिविर लगाया हुआ है, जहां उसे व्यापक समर्थन मिल रहा है।
पुरूषों के लिए भी बने आयोग
दामन ने ऐलान किया है कि वो जिला अदालतों के बाहर अपने शिविर लगायेगा और देश में घरेलू हिंसा और रेप के मामलों में लिंगभेद करने वाले कानूनों पर अपना 'ऐतराज' दर्ज कराने के साथ मॉग करेगा कि यौन हिंसा के लिये मर्द व औरत दोनो को बराबर का जिम्मेदार माना जाय। उसने केन्द्र सरकार से राष्टीय महिला आयोग की तर्ज पर राष्टीय पुरूष आयोग बनाने की मॉग भी की है। अध्यक्ष अनुपम दुबे का कहना है देश में महिला और पुरूष दोनों का बराबर का दर्जा मिला हुआ है तो हमारे लिए पुरूष आयोग क्यों नहीं बनना चाहिए। संस्था इस मामले पर जल्द ही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र के जरिए पुरूषों के लिए आयोग बनाए जाने की मांग करेगा।
Published on:
08 Nov 2017 10:25 am

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