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घर में किराएदार हैं तो आयकर रिटर्न भरते समय रखें ध्यान

आयकर विभाग को देना होगा किराएदारों का ब्योराकिराएदारी छिपाने वाले मकान मालिक नहीं बचेंगे

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घर में किराएदार हैं तो आयकर रिटर्न भरते समय रखें ध्यान

घर में किराएदार हैं तो आयकर रिटर्न भरते समय रखें ध्यान

कानपुर। किराएदार रखने वाले मकान मालिकों को अब आयकर रिटर्न भरते समय किराएदार की जानकारी भरनी पड़ेगी। ऐसा न करने वालों के खिलाफ आयकर विभाग अपने स्तर से जवाब-तलब या आवश्यक कार्यवाही भी कर सकता है। दरअसल किराएदारी से आय पाने वाले मकान मालिकों को ७० फीसदी राशि पर आयकर देना होगा। जबकि इसमें तीस प्रतिशत की छूट दी जाएगी। कानपुर के कई इलाकों में किराएदार रहते हैं। सबसे ज्यादा किराएदार काकादेव इलाके में हैं।

देना होगा पैन या आधार नंबर
मकान मालिक को आयकर रिटर्न भरते समय किराएदार का पैन या आधार नंबर देना होगा। लॉज मालिक हैं तो सभी किराएदार का ब्योरा आयकर रिटर्न में देना होगा। वित्तीय वर्ष 2020-21 के आयकर रिटर्न में किराएदारों का पैन या आधार नंबर देना अनिवार्य कर दिया गया है। रिटर्न में किराए की राशि का भी जिक्र करना होगा। केंद्र सरकार के कर व वित्त सलाहकार डॉ. पवन जायसवाल ने बताया कि अबतक आयकर रिटर्न भरते समय मकान में किराएदारी दिखाना अनिवार्य नहीं था। नए वित्तीय वर्ष से किराएदारी पर आयकर में किया गया बदलाव अप्रैल 2020 से प्रभावी हो जाएगा।

किराएदार छिपाना नहीं होगा आसान
जो मकान मालिक किराएदारी से होने वाली आय छिपाते हैं तो पकड़े जाएंगे। खासकर कर्मचारियों को किराए पर रखने वाले मकान मालिक आयकर विभाग से बच नहीं सकते। कर व वित्त विशेषज्ञ डॉ. पवन जायसवाल कहते हैं कि आयकर में छूट पाने के लिए कर्मचारी किराएदारी की रशीद अपने रिटर्न में लगाते हैं। किराए से आय रिटर्न में नहीं दर्शाने पर किराएदारी को जारी रशीद से आयकर विभाग मकान मालिक को नोटिस भेज देगा।

आर्थिक गणना से मिलेगा ब्योरा
आयकर विभाग आर्थिक गणना से मकान, लॉज और हॉस्टलों में रहने वाले किराएदारों का ब्योरा लेगा। आर्थिक गणना 2020 में सभी घरों के आंकड़े लिए जा रहे हैं। इसके बाद जनगणना भी होगी। दोनों गणना से मिलने वाले आंकड़े के बाद किराएदारी छिपाने वाले मकान मालिकों की पहचान की जाएगी।

कोचिंग मंडी के हर घर पर नजर
शहर के काकादेव इलाके में स्थित कोचिंग मंडी सहित आसपास के इलाके पर आयकर विभाग की नजर है। कोचिंग के लिए बाहरी जिलों और गंाव देहात से आने वाले छात्र काकादेव में ही हॉस्टल, लॉज या निजी मकानों में किराए पर रहते हैं। कई घरों को मकान मालिकों ने पूरा-पूरा हॉस्टल जैसा बना दिया है। हर तीन से चार मंजिला मकान में ग्राउंड फ्लोर पर मकान मालिक का परिवार और बाकी सभी फ्लोर पर छात्र-छात्राओं को रखा गया है। अब इनसे होने वाली आय को रिटर्न में दर्शाना होगा।

किराया भी होगा महंगा
सरकार के इस फैसले से किराएदारों के लिए भी परेशानी बढ़ेगी। ७० फीसदी राशि पर पडऩे वाले टैक्स के चलते अब मकान मालिक किराया भी बढ़ा देंगे। इसके पीछे किराएदार के सामने रखने के लिए उनके पास तर्क भी होगा। ज्यादा नहीं तो दिए जाने वाले टैक्स के बराबर राशि तो मासिक किराए में बढ़ाया जा सकता है। वैसे भी काकादेव इलाके में कमरे काफी महंगे हैं, अब इस फैसले के चलते यह महंगाई और बढ़ेगी।