
Doctor's Day 2018 - इस मंदिर पर आकर सभी धर्म के लोग लगाते हैं हाजरी, धरती के भगवान की तारीफ कर चुके प्रधानमंत्री
कानपुर। शहर के कचहरी स्थित फुटपाथ पर मंदिर रूपी अस्पताल चलता है। यहां गरीब, अमीर और हर धर्म के मरीजों का निशुल्क में इलाज होता है। धरती के भगवान डॉक्टर अजित मोहन चौधरी सुबह पहर दवाईयों के साथ क्लीनिक पर पहुंच जाते हैं और जटिल से जटिल रोगों से ग्रसित मरीजों का इलाज कर उन्हें जिंदगी दे रहे हैं। डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि उनकी डिक्सनरी में मरीज कौन है, गरीब, अमीर है, उसका मजहब क्या है, कोई फर्क नहीं पड़ता। उनके कदम बढ़ चलते हैं। एक ही मकसद सिर्फ मरीज के दर्द को दूर करना। तभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो पर प्रसारित होने वाले मन की बात के 42 वें एपीसोड में डॉक्टर चौधरी के कार्य की जमकर तारीफ की थी। डॉक्टर्स डे पर चौधरी कहते हैं कि आज के दौर में डॉक्टर्स अपने पेशे से भटक गए और पैसा कमाने के चक्कर में मरीजों की जमीन-जायदादा तक बिचवा देते हैं। नब्ज पकड़ कर मर्ज बताने के बजाए पैथालॉजी में मरीजों को भेजते हैं और गरीब के पैसे से तिजोरी भरते हैं, जो सरासर गलत है।
हर कदम ऐसा चलो की निशां बन जाए
सड़क पर गरीबों का अस्पताल चला रहे डॉक्टर अजीत मोहन चौधरी की कार्य की प्रसंसा पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने 42 वें एपीसोड में की थी। पीएम के जरिए मिली प्रसंसा के बाद डॉक्टर बहुत खुश नजर आए। डॉक्टर ने कहा कि काम करो ऐसा की पहचान जाए, हर कदम ऐसा चलो की निशां बन जाए, यंहां जिंदगी तो सभी काट ही लेते हैं, जिंदगी जियो ऐसी की मिसाल बन जाए। बस अपने इसी धुन के सहारे क्लीनक पर आने वाले मरीजों की सेवा करता हूं। मेरे मंदिर-मस्जिद में पैसा और फल-मेवा नहीं चढ़ते। हां गरीब जब ठीक हो जाता है तो आकर हमें गले लगाता है तो हमें सब कुछ मिल जाता है। डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि हमारा पेशा गरीबों को बेतहर इलाज कर उनकी जिंदगी बचाना होता है। ईश्वर जन्म देता है तो जमीन पर हम गरीबों को जिदंगी देते हैं। पर आज के दौर में डॉक्टर पैसे के पीछे भाग रहे हैं। उन्होंने अपने पेशे को बदमान कर दिया है। हमारी उनसे अपील है कि कुछ ऐसा करो की दुनिया तुम्हे याद रखे।
दो से तीन घंटे करते हैं मरीजों का इलाज
डॉक्टर अजीत मोहन चौधरी ने बताया कि हमने अपने अपनी क्लीनिक से समय निकालकर यहां गरीब और असहाय लोगों का इलाज मुफ्त में करने की ठान ली। हमने चेतना चौराहे पर बने फुटपाथ को अपना ठिकाना बनाया और क्लिनिक खोल दी। हम रोजाना दो घंटे गरीबों और असहाय लोगों का मुफ्त में इलाज करते हैं। जांच करने के बाद अपने पास से दवा भी मुफ्त में देते हैं। अगर किसी मरीज को गंभीर रोग होता है तो उसे अपने हॉस्पिटल भिजवाते हैं और वहां उसका निशुल्क में इलाज किया जाता है। ऑपरेशन के साथ मेडिसिन व इंजेक्शन के साथ पूरा खर्च डॉक्टर चौधरी स्वयं उठाते हैं। डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि महात्मा गांधी ने वकालत की पढ़ाई की हुई थी। चाहते तो ठाठ से जिंदगी गुजार सकते है, पर उन्होंने देश को आजादी दिलाने के लिए अपनी पूरी जिंदगी लगा दी।
खुद का हॉस्पिटल, पूरा परिवार डॉक्टर्स
डॉ चौधरी के परिवार में करीब सभी सदस्य डॉक्टर हैं और वह एक संपन्न परिवार से हैं, बावजूद इसके उनका समाज सेवा का यह जज्बा देख डॉक्टर पेशे के प्रति आदर और सम्मान का भाव जगाता है। डॉ चौधरी की बेटी सिंगापुर में डॉक्टर है, बेटा आईआईटी इंजिनियर है तो वहीं भाई और भाभी शहर के नामी डॉक्टर्स हैं। ऐसे संपन्न परिवार के होते हुए भी शहीद परिवारों के लिए डॉ चौधरी फुटपाथ पर अपना क्लीनिक चलाते हैं, जबकि उनका खुद का अपना 100 बेड का अस्पताल है। डॉ चौधरी के अनुसार उनके पास रोजाना 25 से 30 मरीज इलाज के लिए आते हैं और वो अपने दो घंटे के शेड्यूल में उनको देखते हैं। डॉ चौधरी कहते हैं कि पिछले दस सालों से डॉक्टर के पेशे से जुड़े लोग व्यवसायिक हो गए हैं। वह इलाज के नाम पर गरीबों से पैसे लेकर अपना घर चमकाते हैं। जबकि उन्हें सबसे पहले अपना धर्म निभाना चाहिए।
मरीज को मानते हैं परिवार का सदस्य
डॉक्टर चौधरी ने बताया कि जब हमारी पहली पोस्टिंग एक अस्पताल में हुई तक हम पैदल लोगों के घर-घर जाकर उनका इलाज करते थे, पर सरकारी अस्पतलों के हालात बदल गए हैं। डॉक्टर अस्पतलों में समय न देकर अपनी प्राईवेट क्लीनिकों में बैठकर मरीजों का इलाज करते हैं। सामान्य परिवार में पले बढ़े डॉक्टर चौधरी (एमबीबीएस एमडी) हर मरीज को अपने परिवार के सदस्य जैसा मानते हैं। डॉक्टर चौधरी ने सोचा भी न था कि चिकित्सक बनने के बाद उन्हें लोग इस तरह चाहेंगे। आज वह कई सामाजिक संगठनों से जुड़कर गरीबों और असहायों को निशुल्क स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन कर उन्हें निशुल्क दवाएं भी देते हैं। अपने नर्सिंग होम में आने वाले गरीब और जरूरतमंद का इलाज भी निशुल्क करने से पीछे नहीं हटते। शायद इसी वजह से इनके मरीज इनको भगवान से कम नहीं मानते।
तब ठान लिया बनूंगा डॉक्टर
डॉक्टर चौधरी ने बताया कि वह मरीजों के लिए हमेशा से समर्पित हैं। जब वह इंटर में थे, तब गांव के एक व्यक्ति को इलाज न मिल पाने पर उन्होंने डॉक्टर बनने की बात कही। जिस पर गांव के एक व्यक्ति ने उनसे कहा था कि वह डॉक्टर नहीं बन पाएगा। तब से ठान लिया था कि अब डॉक्टर बनना है कि अपना जीवन मरीजों को समर्पित करना है। तब से लेकर आज तक वह रोगियों का इलाज प्रभु सेवा समझ कर करते हैं। डॉक्टर चौधरी ने बताया कि जब वो सरकारी अस्पताल में तैनात थे तब कई बार उन्होंने ड्यूटी पर न होते हुए भी देर रात मरीजों की दिक्कत को देखते हुए उनका इलाज किया। राहत मिलने के बाद ही मरीज का हाल लेने के बाद ही घर जाते थे। डॉक्टर चौधरी ने बताया कि उनके कार्य पर परिवार कभी रूकावट नहीं बना। पत्नी, बेटे-बेटियों ने हमारे इस पेशे को आगे बढ़ाया।
Published on:
01 Jul 2018 01:58 am

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