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चार बार के विधायक व पूर्व मंत्री को है गुरूर, किराए के घर में रहते मुलायम के गुरू

4 चार विधायक और दो दफा यूपी सरकार में बोस जी रहे मंत्री, फिर कभी परिवार और खुद का नहीं किया विकास, किराए के मकान में रहता है ये दिग्गज समाजवादी।

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चार बार के विधायक व पूर्व मंत्री को है गुरूर, किराए के घर में रहते मुलायम के गुरू

कानपुर। मेरे पास गाड़ी, बंगला, बैलेंस है, चार बार विधायक, दो दफा मंत्री रहे ,तुम्हारे पास क्या है? मेरे पास जनता का अटूट प्यार और इमान है। यह कोई फिल्म का सीन नहीं हकीकत है। आज जहां प्रधान, पार्षद सभासद, विधायक और सांसद बनने के बाद नेताओं के पास अचूक संपत्ति हो जाती है, वहीं 94 वर्षीय जमुना प्रसाद बोस के पास खुद का घर नहीं है। बांदा में वह किराए के मकान में रहते हैं। बोस जी कहते हैं कि यदि मैं अपने परिवार के बारे में सोचता तो कभी जनप्रतिनिधि नहीं चुना जाता। पूरा जीवन जनता के नाम कर दिया और बदले में मान कमाया।

किराए के घर पर आ चुके हैं दिग्ग्ज
मुलायम सिंह यादव जिन्हें अपना राजनीतिक गुरू मानते हैं, वो इस वक्त किराए के मकान में जिंदगी का आखरी सफर काट रहा है। बांदा के खिन्नी नाका मोहल्ला निवासी जमुना प्रसाद बोस का जन्म 1925 में हुआ था। इनके पिता ब्रिटिश शासनकाल में बांदा नगरपालिका में मुंशी थे। 1945 में बहन की शादी के लिए पैतृक मकान 500 रुपये में बिक गया। उसके बाद पूरा परिवार आज तक किराए के मकान में रह रहा है। उनके दो कमरों के इस घर में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चन्द्रशेखर, पूर्व सीएम मुलायम सिंह आदि दिग्गज हस्तियां आ चुकी हैं।

10 साल की उम्र में कांग्रेस की रखी नींव
ज्मुना प्रसाद बोस महज दस वर्ष की उम्र में 1939 में छात्र कांग्रेस की नींव रखी और हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट में पार्टी का संगठन खड़ा किया। बोस जी बताते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जब भी बांदा आती तो वो हमें बुलाती थीं। बुंदेलखंड की जमीनी हकीकत पूछती और कभी-कभी दिल्ली बुला लिया करती थीं। बोस जी कहते हैं कि इंदिरा गांधी के अलावा पूर्व पीएम चंद्रशेखर से खासा लगाव रहा। वो सच्चे समाजवादी थे। बोस जी ने बताया कि खुद मुलायम सिंह यादव हमनें मिलने के लिए आए और हमारी उनसे दोस्ती हो गई।

पहला चुनाव हार गए थे बोस
बोस जी ने 1961 में कांग्रेस छोड सोशलिस्ट पार्टी ज्वाइन की और 1962 के चुनाव में उतरे। लेकिन वह कांग्रेस की उम्मीदवार सवित्री निगम से मात्र 11 हजार वोटों से हार गए। इसके बाद उन्होंने 1974 में सोशलिस्ट पार्टी से पहली बार बांदा सदर से विधायक बने। फिर 1977 में यूपी के ग्राम विकास व पंचायती राज मंत्री बने। 1985 में फिर विधायक बने। 1989 में मुलायम सरकार में पशुपालन व मत्स्य मंत्री रहे। बोस जी कभी भी मोबाइन फोन नहीं रखा। वो मुलायम सिंह को सीधे पत्र लिखते हैं। उन्हें सिफारिश शब्द से नफरत है।

आज की सियासत से दुखी हैं बोस जी
जमुना आज भी खादी का कपड़ा पहनते हैं और समय के इतने पाबंद कि आमंत्रण पर निर्धारित समय से पांच मिनट पहले पहुंच जाते हैं। बोस जी कहते हैं कि पहले चुनाव पैसों के बल पर नहीं लड़े जाते थे, लेकिन नीति व सिद्वांतों के साथ होते थे। विरोधी भी नीतियों को कोसते थे। व्यक्तिगत हमला नहीं होता था। लंच पैकेट की परंपरा थी ही नहीं। साइकिल और पैदल ही बड़े-बड़े नेता चलते थे। आज की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप पर दुखी बोस बाबू कहते हैं राजनीति में सिद्धांतवादी नेताओं में कमी आना घातक है।

अमीर-गरीब की खाई कम नहीं हुई
पांच साल पहले पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह बांदा आए और उनको मकान देने का प्रस्ताव दिया जिसे बोस ने शुक्रिया कहकर ठुकरा दिया। बोस जी ने इस वक्त देश के हालात पर ज्यादा कुछ तो नहीं बोले पर इतना जरूर कहा कि आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद गरीब और गरीब हो गया। जबकि अमीर और अमीर हो गया। राजनेताओं को इस खाई को कम करना होगा। इसके लिए देश से भ्रष्टाचार को खत्म करने की जरूरत है। बोस जी कहते हैं कि आज भी वह समाजवादी पार्टी के लिए प्रचार करते हैं।